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दिल्ली राज्य सरकार की विफलता के कारण कोरोना वायरस फैला, आनंद विहार बस टर्मिनल और निज़ामुद्दीन मरकज़ मुद्दे पर जांच के निर्देश हेतु सुप्रीम कोर्ट में याचिका

LiveLaw News Network
12 April 2020 1:31 PM GMT
दिल्ली राज्य सरकार की विफलता के कारण कोरोना वायरस फैला, आनंद विहार बस टर्मिनल और निज़ामुद्दीन मरकज़ मुद्दे पर जांच के निर्देश हेतु सुप्रीम कोर्ट में याचिका
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Failure Of Delhi Govt.Led To Spread Corona Virus': Plea In SC Seeks Investigation In To Nizamuddin, 'Anand Vihar Migrant Gathering Issues

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की गई है, जिसमें कोरोनो वायरस (COVID-19) को फैलने से रोकने में कथित विफलता के लिए दिल्ली राज्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार वायरस के संक्रमण को रोकने में नाकाम रही और इसे फैलने दिया गया।

एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड ओम प्रकाश परिहार और एडवोकेट सुप्रिया पंडिता की ओर से एडवोकेट दुष्यंत तिवारी की याचिका में आनंद विहार बस टर्मिनल में लॉक डाउन के बावजूद लोगों के भारी संख्या में जमा होने और निज़ामुद्दीन मरकज़ में लोगों को जमा होने से रोकने और उन्हें नियंत्रित करने में विफल रहे निज़ामुद्दीन मरकज़ प्रमुख मौलाना साद को अब तक गिरफ्तार नहीं करने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच करवाने की मांग की गई है।

पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) ने 16.03.2020 को सोशल डिस्टेंसिंग उपायों पर रिस्पॉन्डेंट नंबर 1 द्वारा जारी एडवाइजरी पर प्रकाश डाला है जिसमें धार्मिक नेताओं को सामूहिक समारोहों को विनियमित करने और भीड़भाड़ को रोकने के लिए सलाह दी गई थी

इसके अलावा, 23.03.2020 को, भारत के प्रधानमंत्री ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए 21 दिनों की अवधि के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की।

आनंद विहार बस टर्मिनल में प्रवासी मज़दूर

हालांकि, लॉकडाउन के बावजूद, 28.03.2020 को, "बिहार और उत्तर प्रदेश के हजारों प्रवासी श्रमिक, जो दिल्ली में काम कर रहे थे, आनंद विहार बस टर्मिनल, दिल्ली के बाहर इकट्ठे हुए और अपने गृह नगर जाने के लिए पहली उपलब्ध बस में सवार होने के लिए इनमें धक्का मुक्की भी हुई।

दलील में कहा गया है कि इन श्रमिकों को रोकने के लिए रिस्पोंडेंट नंबर 5, 2 और 3 द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। वास्तव में, उन्होंने टर्मिनल पर उन्हें छोड़ने के लिए डीटीसी बसों की व्यवस्था की गई

इस प्रक्रिया को 29.03.2020 इसी तरह से दोहराया गया, जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि उत्तरदाता घरों से लोगों को बाहर निकलने से रोकने में विफल रहे, जो आनंद विहार बस स्टॉप और यूपी-दिल्ली सीमा पर भीड़ के रूप में जमा हुए।

दलील में कहा गया है कि वायरस के प्रसार से निपटने के लिए, सभी को सामाजिक दूरी का बनानी चाहिए थी। हालांकि प्रतिवादी पर प्रवासी श्रमिकों को रोकने में विफल रहे और इस तरह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 और आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 और भारतीय दंड संहिता, 1860 के प्रावधानों का उल्लंघन किया।

निज़ामुद्दीन मरकज़

यह याचिका एक अन्य घटना को उजागर करती है। निज़ामुद्दीन मरकज़ में 15.03.2020 और 17.03.2020 के बीच एक धार्मिक सभा हुई जिसमें भाग लेने वाले लोगों में से 24 लोग कोरोना टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए थे।

यह माना गया है कि 2000 से अधिक प्रतिनिधि मरकज़ में मौजूद थे और कई को वायरस के संक्रमण का पॉज़िटिव पाया गया।

इसीलिए रिस्पोंडेंट नंबर 2 निजामुद्दीन मरकज प्रमुख मौलाना साद को गिरफ्तार करने में विफल रहा है, जिन्होंने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था।

याचिका में कहा गया है कि "उत्तरदाता नंबर 2 अब तक यह बताने में विफल रहा है कि निज़ामुद्दीन में आनंद विहार बस टर्मिनल और मरकज़ में भारी संख्या में लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति क्यों दी गई थी और यह विफलता स्पष्ट रूप से वायरस के प्रसार से देश का नागरिको की रक्षा करने में निष्क्रियता की कमी को दर्शाती है।

याचिका में भाजपा नेता कपिल मिश्रा के बयानों का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि दिल्ली सरकार ने उन कॉलोनियों में घोषणा कीं, जहाँ यूपी-बिहार के प्रवासी दिल्ली में रह रहे हैं, उन्हें सूचित किया गया कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित डीटीसी बस उन्हें आनंद विहार बस टर्मिनल ले जाएंगी।

आगे कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने प्रवासी श्रमिकों की बिजली और पानी की आपूर्ति में जानबूझकर कटौती की है, और इसके लिए सीबीआई से जांच की आवश्यकता है।

उसी के आधार पर, याचिकाकर्ता द्वारा निम्नलिखित राहतें मांगी गई हैं:

1. वायरस के प्रसार को रोकने के लिए उनके द्वारा क्या उचित कदम उठाए गए हैं, यह दिखाने के लिए उत्तरदाताओं को निर्देश देना।

2. लोगों को एक जगह पर इकट्ठा होने से रोकने के लिए और टर्मिनल और मरकज़ पर एकत्रित लोगों के लिए उचित सुरक्षा को लागू करने के लिए उपाय करने के लिए उत्तरदाताओं और संबंधित अधिकारियों को निर्देश देना।

3. दिशा-निर्देश देना, उत्तरदाताओं और संबंधित अधिकारियों द्वारा मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए रणनीति तैयार करना।

4. टर्मिनल और मरकज़ पर लोगों की असेंबली को नियंत्रित करने में विफलता के संबंध में सीबीआई को जांच करने के निर्देश।

याचिका 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध की गई है।

याचिका डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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