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न्यायमूर्ति अकिल कुरैशी की मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति का मामला 16 सितंबर के लिए सूचीबद्ध

LiveLaw News Network
5 Sep 2019 2:34 PM GMT
न्यायमूर्ति अकिल कुरैशी की  मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति  का मामला 16 सितंबर  के लिए सूचीबद्ध
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न्यायमूर्ति अकिल कुरैशी की मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति करने में देरी का विरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए CJI रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम आज ही इस पर विचार करेगा। पीठ ने यह कहते हुए मामले को 16 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है।

जस्टिस कुरैशी को किसी अन्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बनाने का सुझाव

इससे पहले 27 अगस्त को केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को अपना जवाब भेज दिया था। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति अकिल कुरैशी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने में असमर्थता जताई है, लेकिन यह सुझाव दिया है कि उन्हें किसी अन्य उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया जा सकता है।

केंद्र की ओर से कॉलेजियम को मिला था संदेश

28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कॉलेजियम इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर फैसला लेगा। सुनवाई के दौरान CJI रंजन गोगोई, जस्टिस एस. ए. बोबडे और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की स्पेशल बेंच ने कहा था कि केंद्र का एक संदेश कॉलेजियम को मिला है।

केंद्र सरकार ने मांगा था 7 दिन का वक़्त

इससे पहले मामले की सुनवाई पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह बताया था कि वो इस संबंध में 1 सप्ताह में फैसला लेगी और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को इसकी जानकारी दे देगी। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि इस मामले में केंद्र को 7 दिन और चाहिए और फिर न्यायमूर्ति अकिल कुरैशी पर फैसला लेकर कॉलेजियम को सूचना दे दी जाएगी।

अदालत मामले को सुनने के लिए हुआ था तैयार

दरअसल बीते 15 जुलाई को इस जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया था। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता गुजरात हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन को याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को देने के निर्देश दिए थे और SG को इस मामले में कोर्ट की सहायता करने को कहा था।

दरअसल ये सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 मई को की थी। ये सिफारिश भी कॉलेजियम द्वारा उसी दिन की गई जिसके द्वारा न्यायमूर्ति डी. एन. पटेल की दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को केंद्र द्वारा अधिसूचित किया गया है।

याचिका में कही गयी बातें

याचिका में यह कहा गया है कि न्यायमूर्ति पटेल के प्रस्ताव पर केंद्र ने 2 सप्ताह के भीतर कार्रवाई की और उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के CJ के रूप में कार्यभार संभाल लिया जबकि न्यायमूर्ति कुरैशी की फाइल को लंबित रखा गया है। इस बीच केंद्र ने 7 जून को न्यायमूर्ति रवि शंकर झा को MP हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त कर दिया था।

याचिका में की गयी मांग

याचिका में केंद्र सरकार को जस्टिस कुरैशी की नियुक्ति के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। न्यायमूर्ति कुरैशी की फाइल की उपेक्षा को याचिका में उजागर करते हुए यह कहा गया है कि केंद्र द्वारा 10 मई के बाद न्यायिक नियुक्तियों की 18 फाइलों को मंजूरी दी गई है।

जस्टिस कुरैशी के बॉम्बे HC स्थानांतरण का भी हो चुका है विरोध

बार के विरोध के बीच गुजरात उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरैशी को पिछले साल अक्टूबर में बॉम्बे उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें न्यायमूर्ति कुरैशी के इस स्थानांतरण का विरोध किया गया था।

गौरतलब है कि जीएचसीएए के अध्यक्ष वरिष्ठ वकील यतिन ओझा ने न्यायमूर्ति कुरैशी के स्थानांतरण पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का सहारा लेने के बार के फैसले की घोषणा की थी। हालांकि CJI रंजन गोगोई द्वारा एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने के बाद इसे वापस ले लिया गया था।

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