सुनवाई के दौरान फेंकीं केस की फाइलें: सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले दो लॉ स्टूडेंट को किया गिरफ्तार

Amir Ahmad

15 July 2026 1:10 PM IST

  • सुनवाई के दौरान फेंकीं केस की फाइलें: सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले दो लॉ स्टूडेंट को किया गिरफ्तार

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा करने और अदालत की कार्यवाही बाधित करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के दो लॉ स्टूडेंट्स को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इनमें से एक स्टूडेंट ने सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, अदालत कक्ष में केस की फाइलें उछाल दीं और जमकर हंगामा किया।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 24 वर्षीय प्रबल प्रताप सिंह, जो लखनऊ यूनिवर्सिटी में लॉ के तृतीय वर्ष के स्टूडेंट हैं और 23 वर्षीय चंद्रभान जो द्वितीय वर्ष के स्टूडेंट हैं के रूप में हुई है।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार 10 जुलाई को जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ के समक्ष हुई घटना के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों की शिकायत पर तिलक मार्ग थाने में FIR दर्ज की गई।

    पुलिस का आरोप है कि प्रबल प्रताप सिंह, जो स्वयं अपने मामले की पैरवी कर रहे थे, उन्होंने सुनवाई के दौरान जजों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और अपनी केस फाइलें अदालत कक्ष में फेंक दीं। जब सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने उनके काम में भी बाधा पहुंचाई।

    यह घटना प्रबल प्रताप सिंह की उस याचिका की सुनवाई के दौरान हुई जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के एक फैसले को चुनौती दी थी।

    सुनवाई शुरू होते ही कानूनी दलीलें देने के बजाय प्रबल प्रताप सिंह ने पीठ से कहा,

    "माननीय न्यायिक सेवक, मैं आपको आदेश देता हूं कि लखनऊ के सहायक पुलिस आयुक्त के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दें।"

    इस पर जस्टिस के. वी. विश्वनाथन ने पूछा,

    "आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?"

    इसके जवाब में प्रबल प्रताप सिंह ने कहा,

    "मेरी तरफ से बस इतना ही। सब कुछ रिकॉर्ड पर है।"

    इसके तुरंत बाद उन्होंने अदालत में कागजात उछाल दिए और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां कीं। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अदालत कक्ष से बाहर ले गया।

    हालांकि घटना के बाद 10 जुलाई को पारित अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए उसके खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू करने की उसकी मंशा नहीं है।

    इस बीच, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

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