CJI प्रदर्शन में 14 साल की छात्रा पर हमले के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, FIR और सुरक्षा पर मांगी रिपोर्ट

Amir Ahmad

10 Sept 2026 4:36 PM IST

  • CJI प्रदर्शन में 14 साल की छात्रा पर हमले के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, FIR और सुरक्षा पर मांगी रिपोर्ट

    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP ) के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी 14 साल की एक लड़की को कथित तौर पर डराने-धमकाने और उसके घर पर पथराव किए जाने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गंभीर रुख अपनाया।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नाबालिग को डराने-धमकाने के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और आपराधिक कार्यवाही आगे बढ़ाने वाले पीड़ित या उसके परिवार पर दबाव बनाने की किसी को अनुमति नहीं दी जा सकती।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली से मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी। अदालत ने FIR की स्थिति, नाबालिग और उसके परिवार की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजाम तथा कथित हमले और धमकी में शामिल लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी।

    अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी कहा कि लड़की की FIR पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और उसे तथा उसके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

    मामला छात्र प्रदर्शन से जुड़ी कार्यवाही के दौरान सामने आया। एडवोकेट टी. भल्ला ने 14 वर्षीय लड़की की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि हाल में एक व्यक्ति ने वीडियो में कथित तौर पर यह दावा किया कि उसने CJP के प्रदर्शन के दौरान लड़की के पिता पर हमला किया। इस व्यक्ति की पहचान स्वतंत्र भारद्वाज के रूप में बताई गई, जिसे बाद में गिरफ्तार कर हिरासत में भेज दिया गया।

    एडवोकेट ने अदालत से कहा कि एक व्यक्ति ने वीडियो में कथित हमले की बात गर्व के साथ स्वीकार की, लेकिन उसके साथ मौजूद लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय बच्चे के खिलाफ FIR दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत है।

    उन्होंने यह भी बताया कि लड़की की FIR संसद मार्ग पुलिस थाने में दर्ज की गई और उसके घर पर पथराव किए जाने के वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध हैं। उन्होंने चिंता जताई कि जांच में समय लग सकता है और यदि इस दौरान बच्ची के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके परिणाम को वापस नहीं बदला जा सकेगा।

    आरोपों पर गंभीरता जताते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि बच्चे के खिलाफ हिंसा करने वाले असामाजिक तत्व खुले घूम रहे हैं और उसे डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं तो यह गंभीर मामला हो सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चे के मामले में सुरक्षा के कुछ उपाय किए जा सकते हैं और स्थानीय पुलिस इस घटना को अलग मामले के तौर पर देख सकती है।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर लड़की की ओर से किए गए पोस्ट के जरिए मामले की जानकारी है। उन्होंने लड़की को 'कमजोर पीड़ित' बताए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह सोशल मीडिया पर लगातार अपनी बात रख रही है। हालांकि चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि बच्चा, बच्चा ही होता है और उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

    इसके बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि FIR पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा पीड़िता तथा उसके परिवार को सुरक्षा दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच संसद मार्ग पुलिस थाने द्वारा की जानी चाहिए।

    कार्यवाही के दौरान एडवोकेट टी. भल्ला ने एक अन्य आरोप भी अदालत के सामने रखा। उन्होंने कहा कि ऐसे वीडियो मौजूद हैं जिनमें प्रदर्शनकारियों पर कथित हमला करने वाले लोगों के साथ चार पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    इसी दौरान सीनियर एडवोकेट पी.वी. दिनेश ने लॉ के दूसरे वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका का भी उल्लेख किया। यह याचिका ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी उस नोटिस के खिलाफ थी जिसे बाद में वापस ले लिया गया। सीनियर एडवोकेट ने कहा कि नोटिस सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बावजूद जारी किया गया, जिसमें छात्र प्रदर्शनकारियों को संरक्षण दिया गया।

    उन्होंने अदालत से इस मामले को भी सुनवाई के लिए लेने का आग्रह किया और कहा कि इस मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश जाना जरूरी है।

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