सुविधाओं की कमी से जूझ रहे राजस्थान के जिला जज से सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चीफ जस्टिस के सामने रखें शिकायत

  • सुविधाओं की कमी से जूझ रहे राजस्थान के जिला जज से सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चीफ जस्टिस के सामने रखें शिकायत

    सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश कुमार गुप्ता को अदालत में बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़ी अपनी शिकायत राज्य के चीफ जस्टिस के सामने रखने को कहा। गुप्ता श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और चार दिन बाद रिटायर होने वाले हैं।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की।

    गुप्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने अदालत को बताया कि वह राजस्थान में सबसे सीनियर जिला जज हैं। इसके बावजूद उन्हें स्टेनोग्राफर और कार्यालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सुविधाओं की कमी के कारण जज को देर रात तक फैसले लिखने पड़ रहे हैं।

    वकील ने कहा,

    “वह अभी भी रात दो बजे तक फैसले लिख रहे हैं।”

    इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि राजस्थान में हाल ही में नए चीफ जस्टिस ने कार्यभार संभाला है और जज को अपनी शिकायतों के संबंध में उनके समक्ष अभ्यावेदन देना चाहिए।

    सीनियर एडवोकेट ने अदालत से इस टिप्पणी को आदेश में दर्ज करने का अनुरोध किया। इसके बाद उन्होंने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और कहा कि उन्हें सभी शिकायतों के साथ उचित प्राधिकारी के समक्ष जाने और उन पर जल्द विचार का अनुरोध करने की स्वतंत्रता दी जाए।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार किया और याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए जज को अपनी शिकायतें उचित प्राधिकारी के समक्ष रखने की स्वतंत्रता दी।

    यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा के खिलाफ दायर अवमानना याचिका से जुड़ा था। गुप्ता ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

    सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी के अपने आदेश में कहा था कि गुप्ता का मूल पद प्रधान जिला जज का ही रहेगा। श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में तैनाती के दौरान भी उन्हें प्रिंसिपल जिला जज के लिए अनुमन्य सभी भत्ते मिलेंगे।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गुप्ता किसी जूनियर अधिकारी या जिला जज को रिपोर्ट नहीं करेंगे। उनका प्रशासनिक नियंत्रण सीधे उस सत्र मंडल के प्रशासनिक या प्रभारी जज के अधीन रहेगा, जिसके क्षेत्र में संबंधित श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक अधिकरण स्थित है।

    गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और लागू स्थानांतरण नीति के विपरीत बार-बार उनका तबादला किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि जयपुर के श्रम न्यायालय में उनकी तैनाती प्रधान जिला जज के पद के अनुरूप नहीं है।

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