चाहे इमारत भी गिर जाए, तो भी आज सीधे सुनवाई नहीं होगी': CJI ने हाईकोर्ट को दरकिनार करने की प्रवृत्ति पर जताई सख्त नाराजगी
Amir Ahmad
20 July 2026 12:29 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति को ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष को पहले क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट को दरकिनार कर सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जा सकती।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से मामले को उसी दिन सूचीबद्ध कर तत्काल राहत देने का अनुरोध किया गया। वकील ने दलील दी कि संबंधित प्राधिकरण भवन को गिराने की कार्रवाई कर रहा है, जबकि निर्माण स्वीकृत नक्शे के आधार पर किया गया। उनका कहना था कि अधिकारी भवन को तालाब की भूमि पर बना बता रहे हैं, जबकि निर्माण विधिवत स्वीकृत योजना के अनुरूप किया गया।
हालांकि, चीफ जस्टिस ने तत्काल सुनवाई और किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से स्पष्ट इनकार किया।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा,
"अगर आज पूरी इमारत भी गिरा दी जाए, तब भी मैं इस मामले को सीधे सूचीबद्ध नहीं करूंगा।"
पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह पहले संबंधित हाईकोर्ट में उपलब्ध वैधानिक उपायों का उपयोग करे।
साथ ही, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हाल के समय में पक्षकार तत्काल राहत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच रहे हैं, जबकि उन्हें पहले संबंधित हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए। उन्होंने इस बढ़ती प्रवृत्ति पर असंतोष व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में प्रथम मंच के रूप में हस्तक्षेप नहीं करेगी।


