NCERT की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' चैप्टर पर हटाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मामला किया बंद

Amir Ahmad

1 Sept 2026 2:59 PM IST

  • NCERT की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार चैप्टर पर हटाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मामला किया बंद

    सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े विवादित अध्याय के मामले में स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही मंगलवार को बंद कर दी। अदालत ने यह आदेश अध्याय को बाद में पाठ्यपुस्तक से हटाए जाने के बाद पारित किया।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि केंद्र द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की ओर से सुझाए गए संशोधनों के आधार पर विवादित अध्याय को बदल दिया गया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि नए अध्याय वाली संशोधित पाठ्यपुस्तकें अब प्रचलन में हैं।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले विवादित अध्याय को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और उसे शामिल करने वाली पाठ्यपुस्तकों के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। अदालत ने अध्याय को मंजूरी देने वाले NCERT और मंत्रालय के अधिकारियों को अवमानना नोटिस भी जारी किए।

    मंगलवार की सुनवाई के दौरान अदालत ने तीन शिक्षाविदों से संबंधित अपने पहले के आदेश के दायरे को भी स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि उसके पिछले आदेश में केवल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से रखी गई दलील दर्ज की गई। इसमें कहा गया कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पाठ्यक्रम समिति के साथ साझा नहीं किया गया, इसलिए यह सामूहिक निर्णय नहीं था।

    पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने स्वयं यह टिप्पणी या निष्कर्ष नहीं दिया कि पाठ्यक्रम सामूहिक निर्णय नहीं था।

    यह स्पष्टीकरण तीन शिक्षाविदों में से एक की ओर से दाखिल आवेदन पर दिया गया।

    सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने अदालत को बताया कि यदि पिछले आदेश की टिप्पणी को न्यायिक निष्कर्ष के रूप में समझा गया तो इससे शिक्षाविदों को नुकसान हो सकता है। सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन और जे. साई दीपक ने भी इस आवेदन का समर्थन किया।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अध्याय तैयार करने में शामिल तीन शिक्षाविदों को केंद्रीय या राज्य विश्वविद्यालयों तथा सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों की शैक्षणिक परियोजनाओं में हिस्सा लेने से रोक दिया था। हालांकि, शिक्षाविदों पर लगाया गया यह प्रतिबंध बाद में सुप्रीम कोर्ट ने वापस ले लिया था।

    विवादित अध्याय को लेकर शुरू हुई स्वत: संज्ञान कार्यवाही अब अध्याय हटाए जाने और संशोधित पाठ्यपुस्तकों के प्रचलन में आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समाप्त कर दी है।

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