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CJI के खिलाफ कथित साजिश : सुप्रीम कोर्ट ने जांच SC के रिटायर्ड जज जस्टिस पटनायक को सौंपी

Live Law Hindi
25 April 2019 4:38 PM GMT
CJI के खिलाफ कथित साजिश : सुप्रीम कोर्ट ने जांच SC के रिटायर्ड जज जस्टिस पटनायक को सौंपी
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जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आर. एफ. नरीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने गुरुवार को यह आदेश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस ए. के. पटनायक सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ फिक्सर और असंतुष्ट कर्मचारियों द्वारा कथित साजिश के संबंध में जांच करेंगे।

सीबीआई, दिल्ली पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख करेंगे मदद
कोर्ट ने कहा कि सीबीआई, दिल्ली पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख जस्टिस पटनायक को इसमे सहायता प्रदान करेंगे। पीठ ने कहा है कि जस्टिस पटनायक अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेंगे। कोर्ट द्वारा जस्टिस पटनायक को पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए भी नियुक्त किया गया था।

बैंस के दावे को किया गया खारिज
वहीं पीठ ने वकील उत्सव बैंस द्वारा उठाए गए विशेषाधिकार के दावे को भी खारिज कर दिया है और उन्हें जांच टीम को इस मुद्दे के संबंध में सभी जानकारी देने का निर्देश दिया है।

बैंस के हलफनामे में किये गये दावे
दरअसल बैंस ने कोर्ट द्वारा शुरू की गई इस कार्यवाही में एक हलफनामा दायर किया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि CJI के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप उन्हें फंसाने के लिए फिक्सर और षड्यंत्रकारियों द्वारा एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी दावा किया गया है कि इस उद्देश्य के लिए फिक्सर द्वारा उन्हें 1.5 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी।

पीठ की बैंस के सीलबंद हलफनामे पर टिप्पणी
पीठ ने इस मुद्दे पर बैंस को बुधवार को सुना था और कहा : "उन्होंने (बैंस) ने सीलबंद कवर में कोर्ट में एक हलफनामा दिया है। इसे रिकॉर्ड में लिया गया है। इसे गोपनीयता के रूप में सील कवर में रखा जाना है। इसमे कथित साजिश से संबंधित अत्यधिक संवेदनशील जानकारी है, उनके अनुसार भारत के मुख्य न्यायाधीश को यौन उत्पीड़न के एक मामले में फंसाने की कोशिश की गई। उस संबंध में उन्होंने कुछ स्थानों पर कुछ व्यक्तियों के साथ मुलाकात की है। शपथपत्र में आगे उल्लेख किया गया है कि असंतुष्ट कर्मचारियों ने अपनी सेवाओं से बर्खास्तगी के बाद यौन उत्पीड़न के झूठे आरोप में भारत के मुख्य न्यायाधीश को दोषी ठहराने के लिए साजिश की है। उन्होंने विशेष रूप से तपन कुमार चक्रवर्ती और मानव शर्मा व अन्य के नाम रखे हैं।"

कोर्ट ने सीबीआई, दिल्ली पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुखों को यह निर्देश दिया था कि वे बैंस द्वारा प्रस्तुत हलफनामे का समर्थन करने वाली संबंधित सामग्री को जब्त करें।

बैंस का विशेषाधिकार दावा और उसका AG द्वारा खंडन
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि CJI के खिलाफ पूर्व जूनियर कोर्ट स्टाफ द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बारे में जस्टिस बोबड़े के पैनल द्वारा इन-हाउस जांच को प्रभावित नहीं किया जाएगा। बैंस ने ये कहते हुए अपने हलफनामे में नाम साझा करने से इनकार कर दिया था कि वे नाम "अधिवक्ता अधिनियम के तहत विशेषाधिकार प्राप्त सूचना" के अंतर्गत हैं।

हालांकि, अटॉर्नी जनरल ने उनके इस दावे का खंडन किया और कहा कि धारा 126 भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत विशेषाधिकार का दावा उनके और कथित फिक्सर/षड्यंत्रकारियों के बीच संचार पर लागू नहीं है।

"उनके अनुसार, कोई व्यक्ति उनके पास 50 लाख रुपये के साथ आया था। उनका कोई मुव्वकिल नहीं है। इसलिए धारा 126 का कोई आवेदन नहीं है," AG के. के. वेणुगोपाल ने कहा।

इस मामले में अबतक का लेखा जोखा
CJI के खिलाफ आरोपों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 20 अप्रैल को शुरू की गई स्वत: संज्ञान कार्यवाही को जारी रखने के लिए 22 अप्रैल को इस विशेष पीठ का गठन किया गया था। 20 अप्रैल को CJI गोगोई, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने इस मामले पर विशेष सुनवाई की थी।

इस दौरान CJI ने उल्लेख किया कि 4 ऑनलाइन समाचार पोर्टलों ने पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप की रिपोर्ट प्रकाशित की थी। CJI ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया कि ये "CJI के कार्यालय को निष्क्रिय करने की साजिश" है। अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने CJI के साथ इसपर सहमति व्यक्त की और इन आरोपों को न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया।

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