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INX मीडिया केस में CBI अदालत ने चिदंबरम की हिरासत 30 अगस्त तक बढ़ाई

LiveLaw News Network
26 Aug 2019 1:41 PM GMT
INX मीडिया केस में CBI अदालत ने चिदंबरम की हिरासत 30 अगस्त तक बढ़ाई
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दिल्ली की राउज़ एवेन्यू सीबीआई विशेष जज अजय कुमार कुहार ने सोमवार को पूर्व केंद्रीय गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम की सीबीआई हिरासत को 30 अगस्त तक चार दिन और बढ़ा दिया।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह कहते हुए हिरासत पांच और दिन बढ़ाने का आग्रह किया था कि पूछताछ अभी पूरी नहीं हुई है। चिदंबरम का 26 अगस्त को सह-अभियुक्तों में से एक के साथ आमना - सामना कराया गया है। INX कंपनी के ईमेल ट्रेल की जांच करने की भी आवश्यकता है। इसके अलावा ईडी जांच के दौरान कुछ सवाल उठे हैं जिनके जवाब तलाशे जाने हैं।

जब जज ने पूछा कि पिछले चार दिनों की पूछताछ में क्या निकला तो SG ने "बड़ी साजिश" पर गौर करने की आवश्यकता भी जताई और कहा कि मनी ट्रेल की जानकारी के लिए पांच देशों को लेटर ऑफ रोगेटरी भेजा गया है।

चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने रिमांड बढ़ाने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूछताछ महज एक ढोंग है। सीबीआई ने उन्हें उस आरोप के बारे में कोई दस्तावेज नहीं दिया है कि उन्हें 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया गया था। सिब्बल ने कहा कि सीबीआई महज सनसनीखेज आरोप लगाकर मीडिया ट्रायल चला रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पीटर मुखर्जी द्वारा दिए गए बयानों के बारे में अभियुक्त से एक ही प्रश्न पूछा गया था और जब अभियुक्त ने इनकार किया तो कोई और प्रश्न नहीं पूछा गया।

इस बात पर जोर देते हुए कि जांच की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए, सिब्बल ने SG से कहा कि वह अदालत को दस्तावेज और केस डायरी दिखाएं। सिब्बल ने कहा कि किसी व्यक्ति को बिना किसी सबूत के हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

सिब्बल ने यह भी कहा कि सीबीआई पूछताछ के लिए अनुचित रूप से लंबा समय खर्च कर रही है और वह भी बिना किसी दस्तावेज के। 'अगर आप हमें दस्तावेज नहीं दिखाना चाहते हैं तो कम से कम इसे अदालत को दिखाएं', उन्होंने टिप्पणी की। सिब्बल ने यह भी कहा कि शेल कंपनियों, विदेशी बैंक खातों, आदि के बारे में अभियुक्त को कोई दस्तावेज नहीं दिया गया है। सिब्बल द्वारा यह भी कहा गया कि आरोपी से ईमेल के मुद्दे पर पहले ही पूछताछ की जा चुकी है और आरोपी पहले ही उन्हें जवाब दे चुके हैं। इसके अलावा 'बड़ी साजिश' के आरोप का भी रिमांड अर्जी में उल्लेख नहीं किया गया है।

मेहता ने सिब्बल के तर्कों पर कहा कि ईमेल के बारे में पूछताछ केवल आंशिक रूप से हुई है। ऐसे और भी प्रश्न हैं जिन्हें पूछे जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, केस डायरी की पुस्तिका प्रस्तुत नहीं की जा सकती क्योंकि स्टॉक खत्म हो गया है। इसलिए, टाइप किया गया संस्करण प्रस्तुत किया गया है। मेहता ने कहा कि अभियुक्त को एक दस्तावेज़ को पढ़ने में 45-60 मिनट लगते हैं और कई दस्तावेज हैं जिनके साथ उनका आमना- सामना करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, लेटर रोगेटरी को 5 देशों में भेजा गया है और उस पर सीबीआई का कोई नियंत्रण नहीं है।

जब केस डायरी ट्रायल जज को सौंपी गई तो सिब्बल ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि इसे निर्धारित प्रारूप में नहीं रखा गया है। मामले की डायरी टाइप किए हुए कागजात की है पुस्तिका प्रारूप के विपरीत।

आरोप है कि 2007 में वित्त मंत्री रहते हुए चिदंबरम ने अपने बेटे कार्ति चिदंबरम के साथ जुड़ी कंपनियों के माध्यम से मीडिया हाउस से पारस्परिक लाभ लेकर INX द्वारा लगभग 305 करोड़ रुपये के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को मंजूरी दी थी।सीबीआई और ईडी द्वारा क्रमशः 2017 और 2018 में मामले दर्ज किए गए थे।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 अगस्त को अग्रिम जमानत के उनके आवेदन को खारिज कर दिया था। पीठ ने कहा था कि यह "मनी लॉन्ड्रिंग का क्लासिक मामला" है। चिदंबरम को कथित भ्रष्टाचार सौदे का "किंगपिन और प्रमुख साजिशकर्ता" बताया गया था।इसके बाद सीबीआई के न्यायाधीश अजय कुमार कुहार ने 22 अगस्त को सीबीआई को चार दिनों के लिए रिमांड की अनुमति दी और कहा कि आरोप "प्रकृति में गंभीर" हैं और मामले में "विस्तृत और गहन जांच आवश्यक" है।

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