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INX मीडिया : CBI रिमांड को चुनौती देने वाली चिदंबरम की याचिका SC में सूचीबद्ध नहीं , CJI से अनुमति नही मिली

LiveLaw News Network
26 Aug 2019 6:10 AM GMT
INX मीडिया : CBI रिमांड को चुनौती देने वाली चिदंबरम की याचिका SC में सूचीबद्ध नहीं , CJI से अनुमति नही मिली
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INX मीडिया मामले में सीबीआई रिमांड को चुनौती देने वाली याचिका के सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध न होने पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस आर बानुमति और जस्टिस ए एस बोपन्ना की पीठ को इसकी जानकारी दी।

सोमवार को उन्होंने पीठ को बताया कि शुक्रवार को पीठ ने कहा कि वो इस याचिका पर भी सुनवाई करेगी लेकिन ये केस अन्य दो केस के साथ सूचीबद्ध नहीं किया गया है। पीठ ने बताया कि रजिस्ट्री को इसके लिए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अनुमति नहीं मिली है। इसके बिना केस सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता। रजिस्ट्री को इसे CJI के सामने रखना होगा। हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वो बाकी दो याचिकाओं पर बहस कर सकते हैं। जस्टिस बानुमति ने कहा कि जब केस की सुनवाई होगी तब देखेंगे।

दरअसल पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की है जिसमें उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट और INX मीडिया भ्रष्टाचार मामले में ट्रायल कोर्ट के 26 अगस्त तक सीबीआई हिरासत में भेजने के आदेश को चुनौती दी गई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को 21 अगस्त को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में उसी दिन ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें गुरुवार को एजेंसी की हिरासत में भेज दिया था और कहा था कि INX मीडिया मामले में उनकी हिरासत में पूछताछ उचित है।

चिदंबरम ने अपनी ताजा याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट जाए बिना सीधे ट्रायल कोर्ट के आदेशों के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए कहा, "याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी और याचिकाकर्ता को रिमांड में प्रतिवादी एजेंसी को हिरासत में लेना 20 अगस्त, 2019 को दिए गए उस फैसले के सीधे अनुक्रम में है जिसमें अग्रिम जमानत के लिए याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज कर दिया था और खुद उच्च न्यायालय ने मामले के गुणों पर कुछ टिप्पणियां की थीं। उन्होंने कहा कि ये याचिका उनकी स्वतंत्रता से संबंधित है, जो "अवैध रूप से छीन ली गई" है।

"याचिकाकर्ता का मामला यह है कि 21 अगस्त, 2019 को जारी गैर-जमानती वारंट के अनुपालन में याचिकाकर्ता की नजरबंदी / गिरफ्तारी और 22 अगस्त, 2019 के आदेश द्वारा उसका बाद का रिमांड पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र और कानून के अधिकार के बाहर है, " याचिका में कहा गया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी के आदेश को बिना विवेक और बिना सोचे समझे पारित कर दिया जबकि शीर्ष अदालत ने मामले को जब्त कर लिया था।

"यह प्रस्तुत किया गया है कि प्रतिवादी (सीबीआई) का आचरण न केवल घृणित है, बल्कि वास्तव में, प्रतिवादी की कार्रवाई से स्पष्ट है कि इस अदालत के अधिकार और महिमा को खत्म करने के लिए पूरी कार्रवाई की योजना बनाई गई थी, जिसमें विशेष न्यायाधीश को गुमराह कर आदेशों को पारित कराया गया।"

अंतरिम राहत के रूप में चिदंबरम ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर अपनी अपीलों के निस्तारण तक ट्रायल कोर्ट के दोनों आदेशों पर पूर्व-पक्षीय रोक की मांग की है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने INX मीडिया मामले के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में चिदंबरम को 26 अगस्त तक गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की है जिसके लिए वो पहले से ही भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की हिरासत में भेजे गए हैं।

हालांकि ईडी मामले में शीर्ष अदालत द्वारा दी गई राहत का बहुत कम प्रभाव पड़ेगा क्योंकि चिदंबरम को भ्रष्टाचार के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सोमवार तक सीबीआई की हिरासत में भेजा गया है।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि चिदंबरम द्वारा दायर सभी तीन अपीलों - दिल्ली उच्च न्यायालय के सीबीआई मामले और ईडी मामले में उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज के आदेश और ट्रायल कोर्ट के आदेशों के खिलाफ 26 अगस्त को सुनवाई की जाएगी।

दरअसल वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल में 2007 में 305 करोड़ रुपये के विदेशी धन प्राप्त करने के लिए INX मीडिया समूह को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) की मंजूरी में अनियमितता का आरोप लगाते हुए CBI ने 15 मई, 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज की थी।इसके बाद, ED ने 2017 में मनी-लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।

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