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CAA पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, नागरिकता कानून पूरी तरह कानूनी और संवैधानिक 

LiveLaw News Network
17 March 2020 9:26 AM GMT
CAA पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, नागरिकता कानून पूरी तरह कानूनी और संवैधानिक 
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केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 ( CAA) का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट में प्रारंभिक हलफनामा दायर किया है।

इसमें केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि CAA किसी नागरिक के किसी भी मौजूदा अधिकार को प्रभावित नहीं करता है। यह उनके कानूनी, लोकतांत्रिक या धर्मनिरपेक्ष अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा। ये संसद की संप्रभु शक्ति से जुड़ा मामला है और अदालत के समक्ष इस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

हलफनामे में कहा गया है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को चिन्हित करने के लिए संसद सक्षम है और ये "उचित वर्गीकरण" के सिद्धांत के तहत परस्थितियों में कानून के समान आवेदन से अपवादों के लिए प्रदान किया गया है।

केंद्र ने कहा है कि CAA नागरिकता नहीं छीनता बल्कि नागरिकता देने के बारे में है। याचिकाकर्ताओं ने यह नहीं बताया है कि देश में रहने वाले अल्पसंख्यकों के लिए CAA भेदभावपूर्ण कैसे है।

हलफनामे में कहा गया है कि CAA पूरी तरह से कानूनी और संवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत, संसद को 7 वीं अनुसूची में सूची एक में सूचीबद्ध किसी भी मामले के संबंध में कानून बनाने की विशेष शक्ति मिली है जबकि संसद को नागरिकता पर कानून बनाने के लिए संप्रभु शक्तियां भी मिली हैं।

केंद्र ने कहा है कि अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानून के समक्ष समान संरक्षण की बात करता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 20 से ज्यादा ऐसे फैसले दिए हैं जहां यह कहा गया है कि यदि उन समूहों का एक उचित वर्गीकरण है जो स्वयं द्वारा एक वर्ग बनाते हैं तो वह कानून मान्य होगा।

केंद्र ने कहा है कि यहां तीन देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश, जिन्हें इस्लामी देश घोषित किया गया है, के छह समुदायों के विश्वास के आधार पर एक सताए गए, पीड़ित समूह ने उस उचित वर्गीकरण का निर्माण किया है।

हलफनामे में दावा किया गया है कि CAA किसी भारतीय से संबंधित नहीं है। यह ना तो उनके लिए कोई नागरिकता बनाता है और ना ही उसे दूर करता है।

इससे पहले पांच मार्च को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे से जल्द सुनवाई की मांग की थी जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि वो अंतरिम राहत के लिए जल्द सुनवाई कर सकते हैं।

वहीं इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अदालत को बताया था कि वह अगले दो दिनों में इस मामले में जवाब दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि जवाब तैयार है वो हलफनामा दाखिल करेंगे।

दरअसल नागरिकता संशोधन अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में 140 याचिकाएं दायर की गई हैं। 22 जनवरी को पीठ ने केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर याचिकाओं का जवाब देने को कहा था। केरल और राजस्थान राज्य ने अधिनियम के खिलाफ एक मूल मुकदमा दायर किया है

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