महाराष्ट्र में डॉक्टर्स पर एक और हमला: चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऐसे लोगों को सड़कों पर घूमने का हक नहीं

Amir Ahmad

7 Sept 2026 4:27 PM IST

  • महाराष्ट्र में डॉक्टर्स पर एक और हमला: चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऐसे लोगों को सड़कों पर घूमने का हक नहीं

    अस्पताल में डॉक्टरों पर कथित हमले के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश सुखर्या म्हात्रे की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में डॉक्टरों पर हमले की एक और घटना का जिक्र करते हुए कड़ी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के सहयोगियों से जुड़े लोगों में इस तरह की घटनाओं की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि ठीक एक दिन पहले भी इसी तरह की घटना सामने आई, जिसमें उसी समूह के लोगों द्वारा पालघर के निजी अस्पताल में कथित तौर पर डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दही हांडी कार्यक्रम में घायल हुए पांच लोगों को अस्पताल से छुट्टी देने को लेकर विवाद के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं पर अस्पताल में हिंसा करने का आरोप लगा।

    जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता के साथियों में ऐसी घटनाओं की प्रवृत्ति दिखाई देती है।

    बेंच ने कहा,

    “हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कल भी एक घटना हुई। वही लोग फिर डॉक्टरों पर हमला कर रहे हैं।”

    अदालत ने कहा कि अस्पताल के भीतर जाकर डॉक्टरों को बेरहमी से पीटना कैसे जायज ठहराया जा सकता है। यह कानून-व्यवस्था का गंभीर मामला है। ऐसे लोगों को हिरासत में रखा जाना चाहिए।

    जस्टिस मेहता ने कहा कि ऐसे लोगों को सड़कों पर घूमने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट म्हात्रे की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के 18 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके जरिए मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई उनकी जमानत पर रोक लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने बाद में 7 अगस्त को जमानत की कड़ी शर्तें भी लगाई। ये आदेश डॉक्टरों पर कथित हमले के बाद हाईकोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही में पारित किए गए।

    मामला 6 जुलाई की उस घटना से जुड़ा है, जिसमें नौ महीने की गर्भवती महिला को कथित तौर पर प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल में कई घंटे इंतजार करना पड़ा था। म्हात्रे का दावा है कि महिला के परिवार के बार-बार फोन करने पर वह अस्पताल पहुंचे थे। इसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों के साथ विवाद हुआ। 7 जुलाई को FIR दर्ज की गई, जिसमें म्हात्रे को आरोपी नंबर एक बनाया गया।

    कल्याण के मजिस्ट्रेट ने 14 जुलाई को म्हात्रे को जमानत देते समय उनकी उम्र, स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, फरार होने की आशंका नहीं होने और मुख्य CCTV साक्ष्य पहले ही सुरक्षित किए जाने जैसे पहलुओं पर विचार किया।

    इसके बाद डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 जुलाई को स्वत: संज्ञान लेते हुए जमानत पर रोक लगाई और म्हात्रे को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। करीब दो सप्ताह बाद हाईकोर्ट ने उन्हें फिर जमानत दे दी लेकिन कड़ी शर्तें लगा दीं।

    इन शर्तों में गोवा के कैलंगुट में रहने, सप्ताह में तीन बार अंजुना पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाने और मुकदमे की शुरुआत होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहने का निर्देश शामिल था। हाईकोर्ट ने मामले में त्वरित सुनवाई, फोरेंसिक जांच, आरोपपत्र दाखिल करने और विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति को लेकर भी निर्देश दिए।

    सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने म्हात्रे की ओर से कहा कि उन्हें जमानत की शर्तों को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका वापस लेने के निर्देश मिले हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से ऐसा लगता है कि मुकदमा शुरू होने से पहले ही उनके मुवक्किल का दोष तय कर दिया गया।

    रोहतगी ने नई अस्पताल हिंसा को म्हात्रे के “उसी समूह” से जोड़ने पर भी आपत्ति जताई और जमानत के मुद्दे को समाप्त करने का आग्रह किया। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा कि मुकदमा जल्द चलाने में क्या आपत्ति है।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह म्हात्रे को जमानत की शर्तों के खिलाफ अपनी याचिका वापस लेने से नहीं रोक सकता।

    जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि अदालत उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति देगी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार की ओर से म्हात्रे को जमानत दिए जाने के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी।

    जस्टिस नाथ ने कहा कि इस मामले में संदेश जाना जरूरी है और यह संदेश केवल संबंधित लोगों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सभी के लिए निवारक प्रभाव पैदा करना चाहिए।

    अदालत ने अंततः म्हात्रे को जमानत की कड़ी शर्तों के खिलाफ अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें म्हात्रे को जमानत दिए जाने को चुनौती दी गई। म्हात्रे को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है और उसके बाद मामले की सुनवाई होगी।

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