बिजली दर वृद्धि विरोध प्रदर्शन मामला: पंजाब सीएम भगवंत मान और AAP नेताओं को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
Amir Ahmad
30 July 2026 2:03 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया। यह नोटिस चंडीगढ़ प्रशासन की उस याचिका पर जारी किया गया जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के FIR रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने की। पीठ ने याचिका पर सभी पक्षों से जवाब मांगा।
सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने गंभीर आरोपों के बावजूद आपराधिक कार्यवाही रद्द कर कानून सम्मत दृष्टिकोण नहीं अपनाया।
उन्होंने कहा,
"गैरकानूनी जमावड़ा होने की बात स्वीकार है। आरोपी मौके पर मौजूद थे और एफआईआर में उनके नाम दर्ज हैं। प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई, पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रथम दृष्टया अपराध बनता है।"
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने यह भी तर्क दिया कि हाईकोर्ट का यह कहना कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू नहीं होने के कारण गैरकानूनी जमावड़ा नहीं माना जा सकता, कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।
उन्होंने कहा,
"यदि किसी व्यक्ति ने स्वयं हिंसा नहीं की, तब भी गैरकानूनी जमावड़े के किसी सदस्य द्वारा किया गया कृत्य अन्य सदस्यों पर भी लागू हो सकता है।"
यह मामला वर्ष 2020 में बिजली दरों में बढ़ोतरी के विरोध में AAP द्वारा निकाले गए प्रदर्शन मार्च से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा समेत विभिन्न आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई।
बाद में हाईकोर्ट ने भगवंत मान और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
संक्षिप्त सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के अलावा AAP नेताओं अमन अरोड़ा, दलजीत सिंह चीमा और महेशिंदर सिंह ग्रेवाल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि राजनीतिक दलों के लिए नारेबाजी सामान्य बात है। वहीं एक अन्य सुनवाई में अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि अमन अरोड़ा के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाने का कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है।


