BCCI को भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधि बताने के खिलाफ याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- न्यायिक समय की बर्बादी

Amir Ahmad

22 Jan 2026 1:11 PM IST

  • BCCI को भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधि बताने के खिलाफ याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- न्यायिक समय की बर्बादी

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को भारत की आधिकारिक राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के प्रतिनिधि के रूप में पेश किए जाने पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

    चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने एडवोकेट रीपक कंसल द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए दिल्ली हाइकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पीआईएल पर सुनवाई से इनकार किया गया था।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल उठाया कि क्या BCCI भारतीय क्रिकेट का मालिक बन सकता है।

    इस पर चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्य कांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि दो या तीन टीमें खुद को भारत का प्रतिनिधि बताने लगें तो आपसी टकराव की स्थिति पैदा हो जाएगी।

    उन्होंने कहा,

    “यह जरूरी है कि यह स्पष्ट हो कि भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। इस याचिका की कोई आवश्यकता नहीं थी।”

    जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में केरी पैकर जैसी स्थिति नहीं है, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया में समानांतर क्रिकेट टीम बनाई थी।

    उन्होंने कहा कि यदि भारत सरकार यह कहती कि कोई निजी संस्था जबरन टीम इंडिया का दर्जा हासिल कर रही है तब मामला अलग होता।

    जस्टिस बागची ने कहा,

    “खेल मंत्रालय ने BCCI को समर्थन और मान्यता दी है, ऐसे में इसे लेकर सवाल उठाने का कोई कारण नहीं है।"

    पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही BCCI के संचालन को लेकर कई आदेश पारित कर चुका है। साथ ही हाल ही में संसद द्वारा पारित राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम का भी उल्लेख किया गया, जो सभी खेल संस्थाओं को नियंत्रित करेगा।

    चीफ जस्टिस ने बताया कि राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण के गठन को लेकर अधिसूचना भी जारी हो चुकी है, जिसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट या हाइकोर्ट के पूर्व जज होंगे।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर कोई लागत न लगाकर काफी उदारता दिखाई थी।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि BCCI के पास अत्यधिक धन होने के कारण कभी-कभी पूंछ कुत्ते को हिलाने लगती है।

    इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कई बार क्रिकेट किसी और चीज का उप-उत्पाद बनकर रह जाता है।

    पीठ ने याचिका को न्यायिक समय की बर्बादी बताते हुए खारिज कर दिया।

    शुरुआत में चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही थी लेकिन वकील के अनुरोध पर लागत लगाने वाला हिस्सा हटा लिया गया।

    याचिका में मांग की गई कि प्रसार भारती जो दूरदर्शन और आकाशवाणी का संचालन करता है, BCCI की टीम को भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम या टीम इंडिया के रूप में पेश न करे।

    याचिकाकर्ता का तर्क था कि BCCI एक निजी संस्था है जिसे न तो राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में मान्यता प्राप्त है और न ही वह सूचना का अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण है।

    याचिका में यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय नाम, ध्वज और प्रतीकों का उपयोग राष्ट्रीय प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग निवारण) अधिनियम और फ्लैग कोड का उल्लंघन हो सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया।

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