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अयोध्या विवाद : बुधवार को मैराथन सुनवाई खत्म होने की उम्मीद, 40 दिन सुनवाई के साथ सुप्रीम कोर्ट इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा मामला

LiveLaw News Network
15 Oct 2019 1:43 PM GMT
अयोध्या विवाद : बुधवार को मैराथन सुनवाई  खत्म होने की उम्मीद,  40 दिन सुनवाई के साथ सुप्रीम कोर्ट इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा मामला
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अयोध्या रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई के दौरान संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अब कहा है कि मामले की सुनवाई का बुधवार आखिरी दिन है । उम्मीद है कि अब ये सुनवाई 40 वें दिन बुधवार को ही खत्म हो जाएगी।

मंगलवार को सुनवाई के 39 वें दिन सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने कहा कि बुधवार को सुबह 45 मिनट तक हिंदू पक्षकारों की ओर से पेश वकील सीएस वैद्यानाथन बहस पूरी करेंगे फिर मुस्लिम पक्षकारों को एक घंटे का वक्त जवाब देने के लिए मिलेगा ।

45-45 मिनट के चार स्लॉट अन्य पक्षकारों को मिलेंगे और उम्मीद है कि मोल्डिंग ऑफ रिलीफ यानी पक्षकारों को विकल्प के तौर पर राहत की सुनवाई भी इसी दौरान होने की उम्मीद है।

दूसरी सबसे बड़ी सुनवाई

वहीं सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ये दूसरी बड़ी सुनवाई बन गई है और इससे पहले केशवानंद भारती मामले की सुनवाई 68 दिन चली थी। 2017 में आधार की अनिवार्यता को लेकर 38 दिनों तक सुनवाई चली । अयोध्या मामले में बुधवार को सुनवाई के 40 दिन पूरे होंगे।

दरअसल 37 वें दिन की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा था कि अब ये सुनवाई 18 की बजाए 17 अक्टूबर को पूरी होगी। 14 अक्टूबर को मुस्लिम पक्षकारों की ओर से राजीव धवन बहस पूरी करेंगे । 15-16 अक्टूबर को हिंदू पक्ष दलीलें देगा और 17 अक्टूबर को राहत को लेकर बहस के बाद ये सुनवाई पूरी हो जाएगी।

फैसला लिखने के लिए मिलेगा चार सप्ताह का समय

26 सितंबर को सुनवाई शुरू होते ही मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने सभी पक्षकारों से कहा था कि इस मामले में दस्तावेजों को देखते हुए अगर फैसला लिखने के लिए जजों की चार हफ्ते का समय मिलता है तो ये एक चमत्कार होगा । उन्होंने कहा था कि अब कुल मिलाकर साढ़े दस दिन की सुनवाई होनी है लिहाजा पक्षकार इतने वक्त में ही सुनवाई पूरी करें क्योंकि 18 अक्टूबर के बाद एक भी अतिरिक्त दिन नहीं मिलेगा।

पीठ ने 18 सितंबर को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो जाएगी। वहीं पीठ ने पक्षकारों को एक बार फिर मध्यस्थता के जरिए समझौता करने की अनुमति दे दी थी ।

मुख्य न्यायाधीश ने पक्षकारों को कहा था कि सभी पक्षों को मिलकर संयुक्त प्रयास करना होगा कि सुनवाई और दलीलें 18 अक्तूबर तक पूरी हो जाए ताकि जजों को फैसला लिखने में चार सप्ताह का समय मिल जाए। साथ ही पक्षकारों के वकील कोर्ट में सुझाव भी दाखिल करें कि इस मामले में राहत किस तरह दी जा सकती है। दरअसल मुख्य न्यायाधीश गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं इसलिए उन्हें इससे पहले ये फैसला सुनाना होगा।

यह था हाईकोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ के सामने अपीलों का समूह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ है, जिसमें फैसला सुनाया गया था कि अयोध्या की 2.77 एकड़ भूमि को 3 भागों में विभाजित किया जाए, जिसमें 1/3 हिस्से में राम लला या शिशु राम के लिए हिंदू सभा द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाना है, इस्लामिक सुन्नी वक्फ बोर्ड में 1/3 और शेष 1/3 हिस्सा हिंदू धार्मिक संप्रदाय निर्मोही अखाड़ा को दिया जाए।

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