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अयोध्या विवाद : मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 18 नहीं, 17 अक्टूबर तक खत्म हो सुनवाई, नई समय सीमा तय

LiveLaw News Network
4 Oct 2019 11:56 AM GMT
अयोध्या विवाद : मुख्य न्यायाधीश ने कहा,  18 नहीं, 17 अक्टूबर तक खत्म हो सुनवाई, नई समय सीमा तय
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अयोध्या रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई के दौरान संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अब कहा है कि मामले की सुनवाई 17 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। इससे पहले उनके द्वारा ये डेडलाइन 18 अक्टूबर तय की गई थी।

शुक्रवार को 37वें दिन की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने कहा कि अब ये सुनवाई 18 की बजाए 17 अक्टूबर तक पूरी होगी। 14 अक्टूबर को मुस्लिम पक्षकारों की ओर से राजीव धवन बहस पूरी करेंगे। 15-16 अक्टूबर को हिंदू पक्ष दलीलें देगा और 17 अक्टूबर को राहत को लेकर बहस के बाद ये सुनवाई पूरी हो जाएगी।

"सुनवाई में अब 10.5 दिन का समय शेष; नहीं मिलेगा एक भी अतिरिक्त दिन"

दरअसल बीते 26 सितंबर को सुनवाई शुरू होते ही मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने सभी पक्षकारों से यह कहा था कि इस मामले में दस्तावेजों को देखते हुए अगर फैसला लिखने के लिए जजों की 4 हफ्ते का समय मिलता है तो ये एक चमत्कार होगा।

उन्होंने आगे कहा था कि अब कुल मिलाकर साढ़े दस (10.5) दिन की सुनवाई होनी बाकी है, लिहाजा पक्षकार इतने वक्त में ही सुनवाई पूरी करें क्योंकि 18 अक्टूबर के बाद एक भी अतिरिक्त दिन नहीं मिलेगा।

पीठ ने पहले 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी करने पर दिया था जोर

गौरतलब है कि पीठ ने बीते 18 सितंबर को यह कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि 18 अक्टूबर तक मामले में सुनवाई पूरी हो जाएगी। वहीं संविधान पीठ ने मामले के पक्षकारों को एक बार फिर से मध्यस्थता के जरिए समझौता करने की अनुमति दे दी थी।

मुख्य न्यायाधीश ने पक्षकारों को यह कहा था कि सभी पक्षों को मिलकर यह संयुक्त प्रयास करना होगा कि सुनवाई और दलीलें 18 अक्टूबर तक पूरी हो जाएं ताकि जजों को फैसला लिखने में 4 सप्ताह का समय मिल जाए। साथ ही पक्षकारों के वकील कोर्ट में सुझाव भी दाखिल करें कि इस मामले में राहत किस तरह दी जा सकती है।

दरअसल मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं इसलिए उन्हें इससे पहले ये फैसला सुनाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के सामने क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस. ए. बोबड़े, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पीठ के सामने अपीलों का समूह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्ष 2010 के फैसले के खिलाफ है, जिसमें यह फैसला सुनाया गया था कि अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ भूमि को 3 भागों में विभाजित किया जाए, जिसमें 1/3 हिस्से में राम लला या शिशु राम के लिए हिंदू सभा द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाना है, इस्लामिक सुन्नी वक्फ बोर्ड में 1/3 और शेष 1/3 हिस्सा हिंदू धार्मिक संप्रदाय निर्मोही अखाड़ा को दिया जाए।

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