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AMU को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जा सकता है या नहीं ? सुप्रीम कोर्ट में सात जजों की संविधान पीठ करेगी तय

Live Law Hindi
14 Feb 2019 6:46 AM GMT
AMU को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जा सकता है या नहीं ? सुप्रीम कोर्ट में सात जजों की संविधान पीठ करेगी तय
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सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ( AMU) को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने के मामले को सात जजों की संविधान पीठ को रैफर कर दिया। अब सात जजों की पीठ को तय करना है कि संसद के कानून से किसी संस्थान को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जा सकता है या नहीं।

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों पीठ ने शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के मापदंडों को परिभाषित करने के लिए मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया।

दरअसल तत्कालीन यूपीए की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2006 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी जिसमें कहा गया था कि AMU अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। विवि प्रशासन ने भी इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक अलग याचिका दायर की थी।

इससे पहले केंद्र की NDA सरकार ने 2016 में शीर्ष अदालत से कहा था कि वह पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा दायर अपील को वापस ले रही है। सरकार ने कहा कि अजीज बाशा मामले में 1967 में पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने कहा था कि AMU एक "केंद्रीय विश्वविद्यालय" है और ये अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है।1967 के फैसले के बाद AMU (संशोधन) अधिनियम, 1981 लागू किया गया। हलफनामे में 1967 में अजीज बाशा केस में संविधान पीठ के जजमेंट को आधार बनाया जिसने कहा था कि AMU को केंद्र सरकार ने बनाया था ना कि मुस्लिमों ने। केंद्र ने यह भी स्टैंड लिया है कि AMU या संसदीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा गठित किसी भी संस्था को अल्पसंख्यक का दर्जा देना संविधान के अनुच्छेद 15 के विपरीत होगा, जो धर्म के आधार पर राज्य द्वारा भेदभाव को रोकता है।

केंद्र ने यूपीए सरकार के वक्त HRD मंत्रालय के उन पत्रों को भी वापस ले लेने की बात की जिनमें फैक्लटी आफ मेडिसिन में मुस्लिमों को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया था। केंद्र ने 1967 के सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के खिलाफ 1981 में संसद में संशोधन बिल पास करते हुए AMU को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया।उसे भी केंद्र सरकार ने गलत ठहराया। हलफनामे में कहा गया कि इस तरह कोर्ट के जजमेंट को निष्प्रभावी करने के लिए संशोधन करना संवैधानिक ढांचे के खिलाफ है। वहीं AMU ने हलफनामा वापस लेने का विरोध करते हुए कहा कि ये स्पष्ट है कि सरकार बदलने से उसका रुख नहीं बदल सकता। जनवरी 2006 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अधिनियम के उस प्रावधान को रद्द कर दिया था जिसके द्वारा विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया था।

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