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आम्रपाली मामला : सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, NBCC को 7.16 करोड़ की राशि जारी करे SC रजिस्ट्री

LiveLaw News Network
26 Aug 2019 6:19 AM GMT
आम्रपाली मामला : सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, NBCC को 7.16 करोड़ की राशि जारी करे SC रजिस्ट्री
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आम्रपाली मामले में एक और अहम आदेश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वो नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ( NBCC) को 7.16 करोड़ रुपये की राशि जारी करे ताकि वो आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट पूरा करने का काम शुरू कर सके।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने समय- समय पर आम्रपाली निदेशकों व अन्य कंपनियों व लोगों द्वारा लिए गए फंड को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के विशेष खाते में जमा कराने के निर्देश दिए थे।

सोमवार को आदेश जारी करते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यू यू ललित की पीठ ने फोरेंसिक ऑडिटर्स को कहा कि वो अपनी रिपोर्ट मामले की जांच कर रहे दिल्ली पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय को सौंपे और एजेंसियां इस संबंध में कठोर कदम उठाएं। पीठ ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को निर्देश दिया कि वो मामले में नजर रखने के लिए निगरानी समिति का गठन करें। अदालत इस मामले की सुनवाई 11 सितंबर को करेगी।

इससे पहले 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को निर्देश दिया था कि वो आम्रपाली फ्लैट खरीदारों का फ्लैट रजिस्ट्रेशन तुरंत शुरू करें। पीठ ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि अथॉरिटी ने उनके आदेश का पालन नहीं किया तो संबंधित अधिकारियों को जेल भेज देंगे।

वहीं दोनों अथॉरिटी की तरफ से कोर्ट को आश्वासन दिया गया कि आम्रपाली मामले के लिए स्पेशल सेल बनाया गया है और अधिकारियों को इसी काम के लिए विशेष तौर पर नियुक्त किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में इस केस की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर बताया था कि कोर्ट के निर्देशानुसार मनी लॉन्ड्रिंग का केस शुरू किया गया है।

दरअसल 23 जुलाई को हजारों होमबॉयर्स को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016 यानी रेरा के तहत आम्रपाली समूह के पंजीकरण को रद्द कर दिया था और नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ( NBCC) को ग्रेटर नोएडा और नोएडा में लंबित निर्माण परियोजनाओं को संभालने का निर्देश था।

पीठ ने पाया था कि आम्रपाली समूह ने ग्रेटर नोएडा और नोएडा के अधिकारियों की मिलीभगत से होमबॉयर्स के पैसों के साथ फर्जीवाडा किया है। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को आम्रपाली के निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू करने और समय-समय पर रिपोर्ट के साथ जांच की प्रगति के साथ अदालत को सूचित करने का निर्देश दिया था।

पीठ ने कहा था कि NBCC रुकी हुई आम्रपाली परियोजनाओं को पूरा करेगी जिसका उसे 8 प्रतिशत कमीशन मिलेगा। होमबॉयर्स को शेष राशि विशेष खाते में जमा करनी होगी। कोर्ट ने यह कहते हुए होमबॉयर्स के हितों की रक्षा की है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को परियोजना संपत्तियों के अलावा आम्रपाली की बाकी संपत्ति से अपना बकाया वसूलना होगा।

वरिष्ठ वकील आर वेंकटरमनी को परियोजना संपत्तियों के संबंध में अदालत रिसीवर नियुक्त किया गया है।वहीं ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने बताया था कि आम्रपाली ग्रुप के अधिकार क्षेत्र में पांच परियोजनाएँ थीं। इसमें से चार खाली जमीन और बिना किसी निर्माण के थी। बकाया 3,400 करोड़ रुपये में से प्राधिकरण को आम्रपाली समूह से केवल 363 करोड़ रुपये मिले थे।

दरअसल होमबॉयर्स ने आम्रपाली समूह की परियोजनाओं में बुक किए गए लगभग 42,000 फ्लैटों पर कब्जे के लिए कई याचिकाएं दायर की हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों द्वारा दलीलें दिए जाने के बाद कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए उनके पास विशेषज्ञता और संसाधनों की कमी है, अदालत ने 10 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

उन्होंने अदालत द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी की देखरेख में एक प्रतिष्ठित बिल्डर को परियोजना सौंपने के लिए अदालत से अनुरोध किया था। पिछले मार्च में अदालत ने दिल्ली पुलिस को आम्रपाली समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा और दो निदेशकों, शिव प्रिया और अजय कुमार को गिरफ्तार करने की अनुमति दी थी। देशभर में बिल्डरों पर सुप्रीम कोर्ट का शिकंजा कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को देश भर के लंबित प्रोजेक्ट की जानकारी लेने के आदेश भी दिए है और दोषी बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।

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