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एडीआर और कॉमन कॉज़ ने लोकसभा चुनाव परिणामों की विसंगतियों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

LiveLaw News Network
14 Dec 2019 2:32 AM GMT
एडीआर और कॉमन कॉज़ ने लोकसभा चुनाव परिणामों की विसंगतियों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और कॉमन कॉज़ ने संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और अपनी याचिका में शीर्ष अदालत से मांग की है कि 17 वीं लोकसभा के चुनाव परिणामों में हुई कथित विसंगतियों की जांच करने के निर्देश दिए जाएं।

अदालत ने रजिस्ट्री को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा दायर याचिका के साथ इस याचिका को टैग करने के लिए कहा है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अदालत में उक्त चुनावों में मतदाता मतदान और अंतिम मतों के विवरण के प्रकाशन की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए याचिका दायर की गई कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया चुनावी अनियमितताओं से मुक्त नहीं है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है।

याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने 2019 के चुनाव परिणामों को चुनौती नहीं दी, लेकिन केवल यह चाहा कि चुनाव आयोग किसी भी चुनाव के अंतिम परिणाम की घोषणा से पहले डेटा का वास्तविक और सटीक सामंजस्य स्थापित करे।

उन्होंने प्रस्तुत किया कि

"... विसंगतियों के सामंजस्य के बिना असत्यापित डेटा के आधार पर परिणाम घोषित करना मनमाना, अन्यायपूर्ण, अपारदर्शी, अतार्किक और असंवैधानिक है। ये विसंगतियां बड़े पैमाने पर हैं। प्रणाली में जनता के विश्वास को कायम रखने करने के लिए भविष्य के चुनावों की निगरानी और समाधान के लिए एक जांच प्रणाली बनाई जाए।"

याचिकाकर्ता संगठन के विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा किए गए एक शोध के आधार पर यह तर्क दिया गया कि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या और मतों की संख्या की गणना के बीच गंभीर विसंगतियां थीं।

"क) कि 542 निर्वाचन क्षेत्रों का सारांश 347 सीटों की विसंगतियों को दर्शाता है। 195 सीटें बिना किसी विसंगति के हैं।

ख) 1 वोट (सबसे कम) से लेकर 101323 वोटों तक विसंगतियां हैं। कुल वोटों का 10.49% (उच्चतम)

ग।) 6 सीटें ऐसी हैं, जहां वोटों में विसंगति जीतने के अंतर से अधिक है। घ) कुल 739104 मतों की प्रकृति में विसंगतियां हैं।

ड) याचिकाकर्ता के विश्लेषण में देखा गया कि विसंगति के संबंध में किसी भी पार्टी के साथ कोई विशेष संबंध नहीं है।"

याचिका में यह आगे बताया गया कि चुनाव आयोग ने 01 जून 2019 को अपने प्रेस नोट में स्वीकार किया था कि, "मतों की गणना का अंतिम डेटा परिणामों की घोषणा के कुछ दिनों के भीतर उपलब्ध कराया गया है ..." इस प्रकार यह स्पष्ट था कि घोषणा परिणाम प्रमाणित और सत्यापित परिणामों के आंकड़ों पर और सटीक मतपत्र के निर्धारण के आधार पर नहीं थे। इसके अलावा आयोग ने अब तक उक्त डेटा को सार्वजनिक नहीं किया।



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