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'एक निडर और स्वतंत्र न्यायाधीश जिसने कानूनी न्यायशास्त्र को समृद्ध किया': सीजेआई रमाना ने दिवंगत न्यायमूर्ति आरसी लाहोटी को श्रद्धांजलि दी

LiveLaw News Network
24 March 2022 8:40 AM GMT
एक निडर और स्वतंत्र न्यायाधीश जिसने कानूनी न्यायशास्त्र को समृद्ध किया: सीजेआई रमाना ने दिवंगत न्यायमूर्ति आरसी लाहोटी को श्रद्धांजलि दी
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भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रमेश चंद्र लाहोटी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना ने गुरुवार को कहा,

"जस्टिस लाहोटी को हमेशा एक निडर और स्वतंत्र न्यायाधीश के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक इस देश में कानूनी न्यायशास्त्र को समृद्ध किया।"

मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि न्यायमूर्ति लाहोटी के निधन से पूरी कानूनी बिरादरी को बहुत नुकसान हुआ है।

सीजेआई ने कहा,

"मैं इस दुख की घड़ी में अपने भाई और बहन न्यायाधीशों की ओर से उनके परिवार और दोस्तों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।"

अदालत में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने भी दिवंगत न्यायमूर्ति लाहोटी को श्रद्धांजलि देने के लिए बार की ओर से सीजेआई में शामिल होने का अवसर लिया।

दवे ने कहा,

"जस्टिस लाहोटी इस अदालत के सबसे बेहतरीन जजों में से एक थे। बार उन्हें हमेशा एक महान जज के रूप में याद रखा जाएगा।"

न्यायमूर्ति लाहोटी की स्मृति के सम्मान में मुख्य न्यायाधीश की अदालत में एक मिनट का मौन रखा गया।

न्यायमूर्ति लाहोटी 12 सितंबर, 1998 से 31 अक्टूबर, 2005 तक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश थे। उन्हें एक जून, 2004 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। वे एक नवंबर, 2005 को सेवानिवृत्त हुए।

न्यायमूर्ति लाहोटी का जन्म एक नवंबर, 1940 को हुआ था। उन्होंने 1960 में जिला गुना में बार ज्वाइन किया और 1962 में एक वकील के रूप में नामांकित किया। अप्रैल, 1977 में उन्हें बार से सीधे राज्य उच्च न्यायिक सेवा में भर्ती किया गया और उन्हें जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

एक वर्ष तक जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्य करने के बाद उन्होंने मई, 1978 में इस्तीफा दे दिया और मुख्य रूप से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस के लिए बार में वापस आ गए।

उन्हें तीन मई, 1988 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। चार अगस्त, 1989 को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। सात फरवरी, 1994 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया।

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