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हेराल्ड हाउस: दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ AJL पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, हेराल्ड हाउस खाली कराने के आदेश पर रोक की गुहार

Live Law Hindi
11 March 2019 1:05 PM GMT
हेराल्ड हाउस: दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ  AJL पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, हेराल्ड हाउस खाली कराने के आदेश पर रोक की गुहार
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दिल्ली स्थित हेराल्ड हाउस को खाली करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए एसोसिएटिड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

अपनी याचिका में AJL ने सुप्रीम कोर्ट से 28 फरवरी के दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने की गुहार लगाई है जिसमें AJL को हेराल्ड हाउस को खाली करने को कहा गया है।

याचिका में ये भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को यह निर्देश जारी करे कि वो हेराल्ड हाउस खाली करने को लेकर कोई कार्रवाई ना करे और कोई कठोर कदम ना उठाए। याचिका में शहरी विकास मंत्रालय के 30 अक्तूबर 2018 के नोटिस पर भी रोक लगाने की मांग की गयी है।

28 फरवरी को दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एसोसिएटिड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें एकल पीठ के दिल्ली स्थित हेराल्ड हाउस को खाली करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वी. कामेश्वर राव की पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि AJL इमारत खाली करे।

18 फरवरी को पीठ ने AJL और केंद्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस दौरान एसोसिएटिड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि 10 जून 2016 को कंपनी को पहला नोटिस भेजा गया था और इस नोटिस में तो प्रिंटिंग प्रेस के नहीं चलने की बात ही नहीं थी।

ये एक कारण बताओ नोटिस था और नोटिस के बाद 1.5 साल तक कुछ नहीं कहा गया। 5 अप्रैल 2018 को दूसरा नोटिस दिया गया और दूसरे नोटिस में भी प्रिंटिंग प्रेस की कोई बात नहीं कही गई। 18 जून 2018 को भेजे गए तीसरे नोटिस में प्रिंटिंग प्रेस की बात कही गई।

हम नवंबर 2016 से प्रेस चला रहे हैं। तकनीक इतने सालों में बदल गई है और लीज़ दस्तावेज में कहीं नहीं कहा गया कि परिसर से ही छपाई होनी चाहिए। उनका कहना था कि, दूसरे अखबारों की प्रेस भी नोएडा में है। अब जमाना डिजिटल अखबार का है।

सिंघवी ने कहा कि किसी इमारत को किराए पर नहीं दिया जा सकता, ऐसा कोई नियम नहीं है। कई इमारतों में ये किया गया है। उन्होंने दलील दी कि लीज़ दस्तावेज में कोई नियम नहीं है कि कंपनी के शेयर किसी और को नहीं दे सकते और असल में ये संपत्ति बेची नहीं गई बल्कि इसके शेयर ट्रांसफ़र किए गए हैं।

वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि AJL की तरफ़ से कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। वर्ष 2008 से लेकर 2017 तक बिल्डिंग में किसी तरह का कोई प्रकाशन नहीं हो रहा है और बिल्डिग का इस्तेमाल दूसरे काम के लिए हो रहा था। इन्होंने एक वेब साप्ताहिक शुरू किया है जो कि नोएडा से चल रहा है और AJL ने ये कंपनी दूसरी कंपनी यंग इंडिया को बेंच दी है।

SG ने आगे यह भी कहा था कि आयकर विभाग के नोटिस के मुताबिक वर्ष 2008 में पूरे अख़बार को बंद कर दिया गया था और अखबार में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को वीआरएस दे दिया गया था। चेयरमैन को निरीक्षण करने हेतु नोटिस भेजा गया था और सितंबर 2016 में निरीक्षण भी किया गया था। इस दौरान टीम को प्रिंटिंग का कोई सामान नहीं मिला था। पहला तल पासपोर्ट ऑफिस को दिया गया है जबकि दूसरे और तीसरे तल किसी और को और चौथा तल AJL के पास। हमें कहा गया था कि प्रिंटिंग शुरू की जाएगी पर वर्ष 2008 से 2016 तक कोई प्रिंटिंग नहीं की गई।

दरअसल एसोसिएटिड जर्नल्स लिमिटेड ( AJL) ने दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ में याचिका दाखिल कर एकल पीठ के 21 दिसंबर 2018 के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें 2 हफ्ते के भीतर उनसे हेराल्ड हाउस को खाली करने को कहा गया था।

दाखिल याचिका में न्याय के हित में 21 दिसंबर 2018 के आदेश पर तुरंत रोक लगाने की गुहार लगाई गई थी। याचिका में कहा गया था कि अगर इमारत खाली करने के आदेश पर तुरंत रोक नहीं लगी तो याचिकाकर्ता को अपूरणीय नुकसान होगा।

इस याचिका में कहा गया था कि एकल पीठ ने इस संबंध में दिए गए तथ्यों व कानूनी पहलुओं पर सही से गौर नहीं किया है। याचिका में इसी तरह लीज पर दिए गए अन्य स्थानों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वहां पर भी इमारत के तलों को किराए पर दिया गया है।

इससे पहले 21 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने एसोसिएटिड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को 2 हफ्तों के भीतर हेराल्ड हाउस को खाली करने के आदेश दिए थे। जस्टिस सुनील गौड़ की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि अगर 2 हफ्ते में AJL ने इमारत खाली नहीं की तो कानून के मुताबिक उनपर कार्रवाई होगी।

इस दौरान हाईकोर्ट ने AJL के 99 फीसदी शेयर यंग इंडियन कंपनी को ट्रांसफर करने पर भी बडे सवाल उठाते हुए कहा कि AJL को यंग इंडियन कंपनी द्वारा हाईजैक कर लिया गया है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिस मक़सद के लिए ये जगह दी गई थी वो वजह अब अस्तित्व में नहीं है। बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर अखबार का दफ्तर होना चाहिए था, उसे टॉप फ्लोर पर शिफ्ट कर दिया और वहां बामुश्किल कोई प्रेस एक्टिविटी होती है। अपने इस फैसले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के हेराल्ड हाउस को लीज का उल्लंघन करने के कारण इमारत खाली करने के नोटिस को सही ठहराया।

फैसले में कहा गया कि हेराल्ड हाउस को लीज पर देने का मुख्य उद्देश्य अब खत्म हो गया है। याचिकाकर्ता ने इसका कोई उदाहरण नहीं दिया कि उनके खिलाफ कार्रवाई गंभीर दुर्भावनापूर्ण है और सत्ता में बैठी सरकार के इस नोटिस से पंडित नेहरू की किस तरह मानहानि हुई या उन्हें प्रभावित किया गया। AJL इस पर भी चुप है कि उसके प्रिंट और ऑनलाइन एडिशन का भारत भर में कितना प्रसार है।

जस्टिस गौड़ ने फैसले में कहा कि यंग इंडियन कंपनी के स्टेक होल्डर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोती वाल वोहरा और ऑस्कर फर्नांडिस हैं। AJL की 413.40 करोड की संपत्ति के 99 फीसदी शेयर गुपचुप तरीके से यंग इंडियन कंपनी के फायदे के लिए ट्रांसफर किए गए। यंग इंडियन कंपनी चेरिटेबल कंपनी है लेकिन ये AJL के 99 फीसदी शेयर ट्रांसफर करने का एक तरीका था। AJL का यंग इंडियन कंपनी में शेयर ट्रांसफर का तरीका सवालों के घेरे में है। इस केस में तकनीकी तौर पर बिक्री, गिरवी रखकर या उपहार के तौर पर AJL के फायदे यंग इंडियन में ट्रांसफर नहीं किए गए।

इससे पहले 22 नवंबर को दिल्ली स्थित नेशनल हेराल्ड बिल्डिंग की लीज़ खत्म करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जस्टिस सुनील गौड़ की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखते हुए तब यथास्थिति बरकरार रखने को कहा था।

दरअसल केंद्र सरकार ने AJL को 15 नवंबर तक ही परिसर खाली करने का नोटिस दिया था। नेशनल हेराल्ड ने शहरी विकास मंत्रालय के 30 अक्टूबर के नोटिस को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस नोटिस में उसकी 56 वर्ष पुरानी लीज़ को खत्म करते हुए आईटीओ के प्रेस एनक्लेव स्थित हेराल्ड बिल्डिंग को खाली करने को कहा गया था।

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