Begin typing your search above and press return to search.
- Home
- /
- ताजा खबरें
- /
- गुजरात में राज्य सभा...
ताजा खबरें
गुजरात में राज्य सभा चुनाव : दो सीटों पर अलग- अलग चुनाव को चुनौती, गुजरात कांग्रेस की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा SC
Live Law Hindi
18 Jun 2019 7:39 AM GMT

x
गुजरात में राज्य की 2 राज्यसभा सीटों के लिए अलग- अलग चुनाव कराने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली गुजरात कांग्रेस की याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को मामले की सुनवाई करेगा।
मामले की जल्द सुनवाई का हुआ आग्रह
मंगलवार को याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील व राज्यसभा सासंद विवेक तन्खा ने जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस सूर्य कांत की अवकाश पीठ के समक्ष इस केस की जल्द सुनवाई का आग्रह किया। उन्होंने पीठ को बताया कि 5 जुलाई को ये चुनाव होने हैं। इस पर पीठ ने कहा कि इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी।
चुनाव आयोग के फैसले को दी गयी है चुनौती
दरअसल गुजरात में राज्य की 2 राज्यसभा सीटों के लिए अलग-अलग उपचुनाव कराने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए गुजरात कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ये दोनों सीटें भाजपा प्रमुख अमित शाह और स्मृति ईरानी के लोकसभा के चुनाव जीतने के कारण खाली हुई हैं।
गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता परेशभाई धनानी द्वारा दायर की गयी याचिका
गुजरात के अमरेली से कांग्रेस विधायक और गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता परेशभाई धनानी द्वारा दायर याचिका में 2 सीटों के लिए एक साथ चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है।
चुनाव आयोग का अपने फैसले के लिए दिया गया तर्क
वकील वरुण के चोपड़ा के माध्यम से दायर इस याचिका में चुनाव आयोग के 15 जून के फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें 5 जुलाई को दोनों सीटों के लिए चुनाव निर्धारित किया गया है। चुनाव आयोग का कहना है कि अमित शाह को 23 मई को लोकसभा चुनाव का विजेता घोषित किया गया जबकि ईरानी का परिणाम 24 मई को घोषित हुआ। ऐसे में दोनों के परिणामों में 1 दिन का अंतर हुआ। ऐसे में दोनों सीटों का चुनाव एक ही दिन होगा लेकिन अलग- अलग होगा।
फैसले को बताया गया "असंवैधानिक, मनमाना, गैरकानूनी"
अमित शाह को केंद्रीय गृह मंत्री और ईरानी को महिला एवं बाल विकास मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। धनानी ने चुनाव आयोग के फैसले को "असंवैधानिक, मनमाना, गैरकानूनी" बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
Next Story