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जग्गी वासुदेव ईशा फाउंडेशन को 'कावेरी कॉलिंग प्रोजेक्ट' के लिए जनता से पैसा लेने से रोका जाए ,कर्नाटक हाईकोर्ट में जनहित याचिका

LiveLaw News Network
17 Sep 2019 1:59 AM GMT
जग्गी वासुदेव ईशा फाउंडेशन को कावेरी कॉलिंग प्रोजेक्ट के लिए जनता से पैसा लेने से रोका जाए ,कर्नाटक हाईकोर्ट में जनहित याचिका
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कर्नाटक हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर मांग की गई है कि गुरुजी जग्गी वासुदेव की अगुवाई में काम करने वाले ईशा फाउंडेशन को निर्देश दिया जाए कि वह निष्पक्षता और न्याय के हित में 'कावेरी कॉलिंग' परियोजना के लिए जनता से धनराशि एकत्रित न करे।

वकील एवी अमरनाथन की तरफ से दायर इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है। याचिका के अनुसार फाउंडेशन कावेरी नदी के जन्मस्थल या उद्गम स्थल तालाकावेरी से थिरुवरुर तक नदी के आस-पास पेड़ लगाने की योजना बना रही है। 639.1 किलोमीटर की इस दूरी को तय करने के लिए फाउंडेशन ने अपनी बाइक रैली की शुरुआत तालाकावेरी से थिरुवरुर के लिए की है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि वह इस मामले में मीडिया रिपोर्ट को करीब से देख रहा है। फाउंडेशन कावेरी नदी को बचाने के लिए 253 करोड़ पौधें लगाने की योजना बना रही है। इसके लिए प्रतिवादी आम जनता से प्रत्येक पौधें को लगाने के लिए 42 रुपए ले रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि अगर 253 को 42 से गुणा करें तो वह कुल 10,626 करोड़ रुपए की राशि एकत्रित कर रहे हैं। जनता से पैसे का यह संग्रह बहुत परेशान करने वाला है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि फाउंडेशन का दावा है कि उसने कावेरी बेसिन के संबंध में अध्ययन किया है। लेकिन उनको यह रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी चाहिए थी, जिसके बाद राज्य सरकार को, इन अध्ययनों पर विचार-विमर्श करके अपनी स्वीकृति देनी चाहिए थी, परंतु यह प्रकिया नहीं अपनाई गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी भी निजी संगठन को,बिना राज्य सरकार की उचित स्वीकृति के, सरकारी जमीन पर काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

इतना ही नहीं राज्य सरकार भी एक निजी संगठन को सरकारी भूमि पर किए जाने वाले काम या प्रोजेक्ट के लिए धन एकत्र करने की अनुमति नहीं दे सकती है। याचिका में मांग की गई है कि प्रतिवादी को निर्देश दिया जाए कि वह 253 करोड़ पौधे लगाने के लिए आम जनता से प्रति पौधे के लिए 42 रुपए एकत्रित न करे। याचिका में कहा गया है कि इसके लिए रिट मंडामस या इसी प्रकृति की अन्य रिट जारी की जाए। साथ ही मांग की गई है कि राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह फाउंडेशन की 'कावेरी कॉलिंग' परियोजना को देखें और इस संबंध में उचित कदम उठाएं।


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