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चारा घोटाला : लालू यादव की जमानत याचिका पर दस अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

Live Law Hindi
5 April 2019 7:48 AM GMT
चारा घोटाला : लालू यादव की जमानत याचिका पर दस अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
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करोड़ों रुपए के चारा घोटाले के 3 मामलों में दोषी ठहराए गए RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब 10 अप्रैल को सुनवाई करेगा।

जल्द सुनवाई की मांग

शुक्रवार को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने लालू की ओर पेश होकर इस केस की जल्द सुनवाई की मांग की। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सहमति जताते हुए कहा कि पीठ 10 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई करेगी।

इससे पहले 16 अप्रैल को याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर उनकी ओर से जवाब मांगा था।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने सीबीआई को लालू यादव की याचिका पर 2 सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने का निर्देश दिया था।

बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर मांगी जमानत

लालू यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पीठ से बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य आधार पर जमानत की मांग की है। उन्होंने पीठ को बताया कि वो एक मामले में 22 महीने, दूसरे मामले में 13 महीने और तीसरे मामले में 21 महीने की सज़ा काट चुके है।

दरअसल लालू यादव ने 3 मामलों में उन्हें जमानत देने से इंकार करने के झारखण्ड उच्च न्यायालय के 10 जनवरी के फैसले को चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में उन्होंने कहा है कि वो 71 वर्ष के हो चुके हैं और उन्हें कई बीमारियां हैं जिनके चलते वो पटना के रिम्स में उपचार भी करा रहे हैं।

क्या है लालू प्रसाद के खिलाफ मामला१

गौरतलब है कि चारा घोटाला अविभाजित बिहार के पशुपालन विभाग में खजाने से वर्ष 1990 के प्रारंभ में फर्जी तरीके से 900 करोड़ रूपए की रकम निकालने से संबंधित है। लालू प्रसाद यादव उस समय बिहार के मुख्यमंत्री थे। लालू इन 3 मामलों में दिसंबर, 2017 से रांची की बिरसा मुण्डा केन्द्रीय जेल में बंद हैं।

अभी तक लालू यादव चारा घोटाला में 3 मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं। लालू को चाईबासा कोषागार के 2 मामलों में 5-5 वर्ष तथा देवघर कोषागार मामले में 3.5 वर्ष की सजा मिल चुकी है। मार्च 2018 में चारा घोटाले के दुमका कोषागार से जुड़े मामले में लालू प्रसाद यादव को रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने आईपीसी की धारा 120 और पीसी एक्ट के तहत 7-7 वर्ष की सजा सुनाई थी।

साथ ही उन पर 30-30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। ये चारा घोटाले में सबसे बड़ी सजा है। डोरंडा कोषागार से जुड़ा चारा घोटाले का पांचवा मामला सबसे बड़ा है जिसमें उनपर करीब 139.35 करोड़ की अवैध निकासी का आरोप है। इसके अलावा लालू भागलपुर के 1 और मामले में आरोपी हैं।

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