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नाबालिग से रेप : सजायाफ्ता आसाराम को नहीं मिलेगी जमानत, हाई कोर्ट के कड़े रुख के चलते सजा स्थगित करने की याचिका वापस ली

Live Law Hindi
26 March 2019 2:38 PM GMT
नाबालिग से रेप : सजायाफ्ता आसाराम को नहीं मिलेगी जमानत, हाई कोर्ट के कड़े रुख के चलते सजा स्थगित करने की याचिका वापस ली
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नाबालिग से रेप के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिल पाई है। अपनी सजा को निलंबित करने की याचिका पर हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद आसाराम ने याचिका वापस ले ली। इस तरह अब उन्हें जमानत नहीं मिल पाएगी।

दरअसल मंगलवार को जोधपुर बेंच में जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस वीरेन्द्र कुमार माथुर की पीठ ने सुनवाई के दौरान आसाराम पर कई सवाल उठाए जिसके बाद उनके वकीलों ने राहत ना मिलते देखकर दाखिल की हुई याचिका वापस ले ली।

दरअसल इस मामले में 2 अन्य आरोपियों शरतचंद्र और शिल्पी की सजा को हाई कोर्ट स्थगित कर चुका है। इसके बाद आसाराम ने याचिका दाखिल कर अपनी सजा को स्थगित कर जमानत देने की याचिका दाखिल की थी। फिलहाल आसाराम ने अपनी आजीवन कारावास की निचली अदालत की सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दे रखी है जिस पर 4 हफ्ते बाद सुनवाई हो सकती है।

गौरतलब है कि आसाराम ने बीते फरवरी में पत्नी की बीमारी के आधार पर अंतरिम जमानत मांगी थी लेकिन वो याचिका भी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी।

आजीवन कारावास की हुई है सजा

25 अप्रैल 2018 को नाबालिग से रेप के मामले में जोधपुर की विशेष अदालत ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि अपनी प्राकृतिक मृत्यु तक वो कारावास में रहेंगे।

जोधपुर सेंट्रल जेल में सुनाए गए इस फैसले में आसाराम की सहयोगी वार्डन शिल्पी और 1 अन्य साथी शरतचंद्र को भी अदालत ने दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष की सजा सुनाई गई जबकि 2 अन्य को बरी कर दिया गया था।

कोर्ट ने IPC की धारा 370(4) के तहत 10 साल की कैद और एक लाख का जुर्माना भी लगाया जबकि धारा 342 के तहत 1 साल की कैद और 1 हज़ार का जुर्माना, धारा 506 में 1 साल की कैद और 1 हज़ार का जुर्माना, धारा 376 (2) f में आजीवन कारावास व 1 लाख का जुर्माना और धारा 376 D में और 1 लाख का जुर्माना व JJACT की धारा 23 में 6 महीने की सजा सुनाई थी।

नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न का है आरोप

यूपी के शाहजहांपुर की एक नाबालिग लड़की द्वारा कथित तौर पर आसाराम पर जोधपुर स्थित अपने आश्रम में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए गए थे। आश्रम में जिस समय पीड़िता रह रही थी तब वह 16 वर्ष की आयु की थी। दिल्ली के कमला मार्केट थाने में यह मामला दर्ज कराया गया था और उसके बाद जोधपुर स्थानांतरित कर दिया गया।

आसाराम पर पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट के तहत कानून की धाराएं लगाई गई हैं। आसाराम को जोधपुर पुलिस ने 31 अगस्त 2013 को गिरफ्तार किया था और तब से वह जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।

आसाराम के साथ उसके प्रमुख सेवादार शिवा, रसोइए प्रकाश द्विवेदी, वार्डन शिल्पी और 1 अन्य साथी शरतचंद्र भी विभिन्न धाराओं में आरोपी बनाए गए थे।

पीड़िता ने दिल्ली जाकर 20 अगस्त, 2013 को कमला मार्केट पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी। वहां से इस केस को जोधपुर रेफर किया गया था।

पीड़िता ने जब आसाराम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे तब वह छिंदवाड़ा आश्रम के कन्या छात्रावास में 12वीं कक्षा में पढ़ती थी। जानकारी के अनुसार पीड़िता के पिता के पास 7 अगस्त, 2013 को छिंदवाड़ा आश्रम से फोन आया कि उनकी बेटी बीमार है। इस पर पीड़िता के पिता वहां पहुंचे तो उन्हे बताया गया कि उनकी बेटी पर भूत-प्रेत का साया है, जिसे सिर्फ आसाराम ही ठीक कर सकते हैं।

इसके बाद पीड़िता के माता-पिता अपनी बेटी के साथ 14 अगस्त को आसाराम से मिलने जोधपुर आश्रम में पहुंचे। इसके अगले दिन 15 अगस्त को आसाराम ने 16 वर्ष की पीड़िता को अपनी कुटिया में बुला लिया और उसके साथ 1 घंटे तक यौन उत्पीड़न किया।

पीड़िता ने इस मामले की जानकारी अपने माता-पिता को दी तो उन्होंने 20 अगस्त, 2013 को दिल्ली के कमला मार्केट पुलिस थाने में रात 2 बजे मामले को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी।

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