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लोकपाल की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा, क्या कदम उठाए गए

LiveLaw News Network
7 Jan 2019 1:05 PM GMT
लोकपाल की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा, क्या कदम उठाए गए
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लोकपाल की नियुक्ति को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केन्द्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सितंबर 2018 से अभी तक सर्च कमेटी के कदम पर एक हलफनामा दाखिल करे। पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा कि वो इस संबंध में 17 जनवरी तक हलफनामा दायर करें।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने ये निर्देश जारी किए। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सितंबर, 2018 से अभी तक कई कदम उठाए गए हैं, तब पीठ ने उनसे पूछा कि इस पूरी प्रक्रिया में इतना वक्त क्यों लिया जा रहा है। हालांकि AG ने कहा कि वो इस संबंध में एक नोट दाखिल कर सकते हैं लेकिन पीठ ने कहा कि वो हलफनामे के जरिए ही इसे रिकार्ड पर लाएं। इधर गैर सरकारी संगठन, कॉमन कॉज की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार ने सर्च कमेटी के सदस्यों के नाम तक अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं किये हैं।

गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में लोकपाल की नियुक्ति के मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के हलफनामे को असंतोषजनक करार देते हुए चार हफ्ते में फिर से नया हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए थे। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति आर बानुमति और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की बेंच ने केंद्र की उन दलीलों को मानने से इनकार किया था जिसमें कहा गया कि 19 जुलाई को प्रधानमंत्री की हाई पॉवर सेलेक्शन कमेटी की मीटिंग हुई जिसमें मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन और भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने हिस्सा लिया जबकि विशेष रूप से आमंत्रित मल्लिकार्जुन खडगे ने भाग लेने से इनकार कर दिया। वहीं केंद्र की ओर से पक्ष रख रहे अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा था कि सर्च पैनल के लिए जल्द ही फिर से मीटिंग का आयोजन किया जाएगी। पीठ ने कहा था कि केंद्र ने ये नहीं बताया कि लोकपाल की नियुक्ति कब तक होगी इसलिए चार हफ्ते में नया हलफनामा दाखिल हो।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील, प्रशांत भूषण ने कहा था कि कानून बने साढ़े चार साल बीत चुके हैं। इसे लेकर केंद्र सरकार गंभीर नहीं है। अब या तो अदालत अवमानना की कार्रवाई करे या फिर संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत को दिए गए अधिकार का प्रयोग करते हुए लोकपाल की नियुक्ति करे। हालांकि पीठ ने कहा था कि वो समय अभी नहीं आया है।

17 जुलाई 2018 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 19 जुलाई को प्रधानमंत्री की हाई पॉवर सेलेक्शन कमेटी की मीटिंग होगी और सर्च कमेटी बनाई जाएगी जो लोकपाल के नाम पर सुझाव देगी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उम्मीद है कि मीटिंग में लोकपाल के नाम को फाइनल किया जाएगा। केंद्र सरकार को 23 जुलाई को रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिया गया था।

2 जुलाई को लोकपाल की नियुक्ति पर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि दस दिनों के भीतर कोर्ट को बताए कि लोकपाल की नियुक्ति कितने वक्त में होगी।

पीठ ने कहा था कि इस संबंध में कोई भी आदेश जारी करने से पहले पीठ, केंद्र सरकार का पक्ष जानना चाहती है।

वहीं केंद्र की ओर से पक्ष रख रहे अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में जल्द ही चयन समिति की बैठक होने वाली है। लोकपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने कहा कि जनवरी 2013 में लोकपाल बिल पास किया गया लेकिन साढे़ चार साल बीतने के बाद भी नियुक्ति नहीं की गई। अब वक्त आ गया है कि कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार का प्रयोग कर लोकपाल की नियुक्ति करनी चाहिए।

हालांकि पीठ ने कहा कि पहले वो केंद्र सरकार का पक्ष जानना चाहती है।

15 मई को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि लोकपाल चयन समिति में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी को "प्रतिष्ठित न्यायविद्" नियुक्त किया गया है। अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ को सूचित किया था कि ये निर्णय 11 मई को लिया गया था, जिससे रोहतगी चयन समिति का हिस्सा बन गए, जिसकी अध्यक्षता प्रधान मंत्री करते हैं। समिति में प्रतिष्ठित न्यायविद् का पद रिक्त पड़ा है क्योंकि वरिष्ठ वकील, पी. पी. राव का पिछले साल सितंबर में निधन हो गया था। एनजीओ, कॉमन कॉज द्वारा दायर एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान ये दलील दी गई जिसमें 27 अप्रैल के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बावजूद भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल की नियुक्ति ना करने का मुद्दा उठाया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि मौजूदा लोकपाल अधिनियम कानून का एक व्यावहारिक हिस्सा है और इसके संचालन को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। केंद्र ने 23 फरवरी को अदालत को सूचित किया था कि लोकपाल की नियुक्ति के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और वर्ष 2014 में लोकसभा और लोकायुक्त अधिनियम को लेकर एक प्रक्रिया अधिसूचित कर दी गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले महीने अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल द्वारा सूचित किए जाने के बाद नियुक्ति के लिए प्रक्रिया को तेज करने के लिए केंद्र को निर्देश दिया था। बताया गया था कि नियुक्ति पर चर्चा करने के लिए 10 अप्रैल को एक बैठक पहले ही आयोजित की जा चुकी है।

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