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धारा 498(ए) के तहत मुकदमा कैसे दर्ज कराते हुए कौन से सबूतों से आरोपियों को सजा करवाई जा सकती है

Shadab Salim
26 Jan 2022 1:31 PM GMT
धारा 498(ए) के तहत मुकदमा कैसे दर्ज कराते हुए कौन से सबूतों से आरोपियों को सजा करवाई जा सकती है
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भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498(ए) एक पत्नी के अधिकारों को सुरक्षित करती है। यह धारा पति और उसके रिश्तेदारों को एक महिला के प्रति क्रूरता करने से रोकती है।

भारतीय महिलाओं के लिए ससुराल एक पिंजरे के रूप में परिवर्तित हो गया, जहां यह माना जाने लगा कि एक महिला चारों ओर से शत्रुओं के बीच है। ससुराल में महिलाओं को पीड़ित किए जाने की घटना दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत धारा 498(ए) इन घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से ही प्रावधानित की गई है।

धारा 498(ए) के अंतर्गत क्रूरता क्या होती है

यह धारा क्रूरता को प्रतिषिद्ध करती है। इस धारा का उद्देश्य शादीशुदा औरतों को ससुराल में होने वाली पीड़ा से बचाना है। इस धारा में इस बात का उल्लेख किया गया है कि अगर किसी शादीशुदा महिला के साथ उसके पति और उसके ससुराल के अन्य लोगों द्वारा किसी भी तरह की क्रूरता की जाती है, तब उन लोगों को दंडित किया जाएगा।

क्रूरता बहुत तरह की होती है, किसी एक भी चीज को हम क्रूरता नहीं मान सकते। यह माना जा सकता है कि क्रूरता एक समूह है जिसकी बहुत सारी शाखाएं हैं। भारत के उच्चतम न्यायालय ने अपने अनेक प्रकरणों में क्रूरता को अलग-अलग तरह से परिभाषित किया गया है, कुछ मुख्य बातें ऐसी हैं जिन्हें स्पष्ट रूप से क्रूरता मान सकते हैं, जैसे-

पति द्वारा पत्नी के साथ मारपीट करना

ससुराल के अन्य लोगों द्वारा महिला के साथ मारपीट करना। इन अन्य लोगों में ससुराल के सभी रिश्तेदार शामिल हैं, जो एक घर में रहते हैं और भले ही किसी दूसरे घर में रहते हैं। जैसे ननंद शादी के बाद किसी दूसरे घर में रहती है पर क्रूरता उसके द्वारा भी की जा सकती है। अगर वह अपने भाई की पत्नी के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट करती है, तब उसे भी क्रूरता ही माना जाएगा।

पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा किसी भी रकम या वस्तु की मांग करना।

पत्नी को उसके शरीर जैसे उसका रंग उसकी कद काठी को लेकर उकसाना, उसे ताने देना।

पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा पत्नी के माता पिता और उसके रिश्तेदारों के संबंध में बुरी बातें बोलना। ऐसी बातें बोलना जिन बातों को कोई भी साधारण आदमी नहीं बोलता है। इन बातों को बोलने का उद्देश्य पत्नी को अपमानित करना होता है।

पति और उसके नातेदारों द्वारा महिला को ऐसी बात बोलना जिससे उस महिला के परिवार के लोगों का अपमान होता है, जैसे महिला के माता-पिता को गरीब बोलना, नंगा बोलना इत्यादि।

खाना बनाने के संबंध में कोई ऐसी बात बोलना जिससे पत्नी अपमानित होती है, जैसे यह कहना कि इसे खाना बनाना नहीं आता है, ऐसी बात भरी सभा में बोलना, बीच लोगों के बोलना, यह सब क्रूरता है।

पति द्वारा किसी दूसरी महिला से शारीरिक संपर्क बनाना या फिर दूसरा विवाह कर लेना। यह भी क्रूरता माना गया है, एक पत्नी किसी भी स्तर पर यह बात स्वीकार नहीं करती है कि उसका पति किसी अन्य महिला के साथ शारीरिक संपर्क बनाएं या फिर किसी अन्य महिला के साथ शादी कर ले या किसी अन्य महिला को रखैल के रूप में रख ले, यह सब कुछ एक पत्नी के प्रति क्रूरता है।

अगर यह कोई भी घटना किसी शादीशुदा महिला के साथ घटती है, तब उसके साथ में यह कृत्य करने वाले भारतीय दंड संहिता की धारा 498(ए) के दोषी हैं।

अब सवाल यह उठता है कि अगर किसी महिला के साथ यह सब कुछ हो रहा है, तब वह कोर्ट तक इस बात को लेकर कैसे जाएं और दोषियों को सजा कैसे करवाएं, इसके लिए उसे कौनसे सबूतों की जरूरत होगी।

पुलिस एफआईआर

जैसे ही किसी महिला के साथ यह सभी घटनाएं घटती हैं, उसे इसकी जानकारी जल्द से जल्द संबंधित पुलिस थाना क्षेत्र पर देना चाहिए। यह जानकारी वह उस पुलिस थाना क्षेत्र पर दे सकती है जहां पर उसका ससुराल है या फिर उस जगह पर दे सकती है जहां पर उसका मायका है या फिर वह उस समय जहां वे रह रही हो वहां के पुलिस थाने में भी इसकी जानकारी दे सकती है।

पुलिस अधिकारियों का यह कर्तव्य बनता है कि वह उस महिला की शिकायत पर संज्ञान लेकर उसकी जांच करें और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें।

इन सबूतों की होती है जरूरत

ऐसी घटनाओं के सबूत एकत्रित करना थोड़ा मुश्किल होता है। महिलाएं भी अपना घर बचाए रखने के कारण इन घटनाओं से बचना चाहती हैं। वह इन्हें सहती रहती हैं और कोई भी बात किसी व्यक्ति को बताती नहीं है, जबकि यह तरीका ठीक नहीं है।

अगर किसी महिला के साथ यह सभी घटनाएं हो रही है तब उसे फौरन इसकी जानकारी अपने आसपास के लोगों को देनी चाहिए, अपने माता पिता को देनी चाहिए, साथ ही उन लोगों को देनी चाहिए जो लोग उसे और उसके ससुराल के लोगों को जानते हैं।

जब भी महिला ऐसी कोई जानकारी किसी व्यक्ति को दें तब अपने फोन की सहायता लेते हुए वॉइस रिकॉर्डिंग कर ले या फिर जब महिला घर के लोग महिला के ससुराल के लोगों के साथ कोई वार्ता कर रहे हो, जिसमें उसके साथ होने वाली क्रूरता के संबंध में बातें की जा रही हैं, उस वार्ता की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली जाए।

इससे यह साबित होता है कि महिला के साथ क्रूरता हो रही थी, इसके संबंध में उसके ससुराल के लोगों को समझाने के प्रयास चल रहे थे, महिला द्वारा अपना घर बसाने के पूरे प्रयास किए गए हैं, उसने अचानक पुलिस से संपर्क कर एफआईआर दर्ज नहीं करवाई है।

अगर महिला के साथ कोई मारपीट की जाती है और ऐसी मारपीट गंभीर हो जाती है, जैसे हाथ या पैर टूट जाए, आंख में चोट आ जाए या फिर कहीं कोई खून निकल आए, कोई नाखूनों के निशान हो, तब उसे ऐसी मारपीट के फौरन बाद पुलिस से संपर्क कर अपनी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करवाना चाहिए। जिसमें डॉक्टर इस बात की पुष्टि करें कि उसके शरीर पर किसी प्रकार के कोई घाव का निशान थे।

यह मेडिकल रिपोर्ट मारपीट का उल्लेख करती है और इससे यह बात भी साबित होती है कि महिला के साथ मारपीट के जरिए क्रूरता की जा रही है।

जब कभी महिला के साथ कोई ऐसी बात की जाए जिससे उसका अपमान हो, उस बात को भी उसे रिकॉर्ड कर लेना चाहिए। चाहे इसी बात व्हाट्सएप के तरीके से किया जाए या फिर भरी सभा में की जाए तब उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग बना ली जाए।

गवाह

महिला के साथ होने वाली क्रूरता की जानकारी उसे समय-समय पर लोगों को देनी चाहिए। ऐसी जानकारी अनजान लोगों को नहीं बल्कि उन लोगों को देनी चाहिए जो उसके हितेषी है। जैसे कि उसके माता पिता उसके भाई बहन इत्यादि इन लोगों को दी जाने वाली जानकारी से इन्हें केस में गवाह बनाया जा सकता है। इन लोगों की गवाही पर आरोपियों को दोषसिद्ध किया जा सकता है और उन्हें सजा हो सकती है।

जैसे जब कभी महिला को ताने दिए जाए, उसे दहेज कम लाने के बारे में बोला जाए, उसके रंग रूप के बारे में बोला जाए, उसकी कद काठी के बारे में बोला जाए, उसकी जाति के संबंध में बोला जाए, उसके माता-पिता के संबंध में बोला जाए, उसके भाई-बहन के संबंध में बोला जाए, कोई भी ऐसी बात बोली जाए जिससे उसका और उसके परिवार का अपमान होता है, उसके दिल को वह बात बुरी लगती है, तब यह बातें महिला को अपने माता पिता, अपने भाई बहन को बतानी चाहिए और मुकदमे में इन सभी को गवाह बनाया जाना चाहिए, जो इस बात की पुष्टि करें कि उन्हें यह बात बताई गई थी।

जहां तक हो सके ऐसी बात फोन काल के माध्यम से बताई जानी चाहिए जिसकी वॉइस रिकॉर्डिंग की जा सके जिससे यह साबित हो कि वाकई में महिला के साथ किसी प्रकार की कोई कुर्ता की गई है

अगर महिला के साथ इन सभी बातों की पुष्टि गवाह पुलिस के समक्ष करते हैं और पुलिस के साथ अदालत में यह लोग वैसा ही बयान देते हैं जैसा बयान उन्होंने पुलिस को दिया है, तब आरोपियों को दोषी ठहराया जा सकता है, क्योंकि मामले में सबूत मिल जाते हैं।

इस तरीके से कुछ मौखिक साक्षी और कुछ दस्तावेजी साक्ष्य के माध्यम से महिला के प्रति होने वाली क्रूरता को साबित किया जा सकता है। अगर ऐसी क्रूरता साबित हो जाती है तब दोषियों को कम से कम 3 वर्ष तक का कारावास तो होता ही है।

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