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वकालत के पेशे में मेंटर की तलाश

Goutham Shivshankar
15 Jun 2020 12:51 PM GMT
वकालत के पेशे में मेंटर की तलाश
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गौतम शिवशंकर

COVID-19 के कारण लागू लॉकडाउन का एक दुष्प्रभाव विभिन्न प्रकार के कानूनी विषयों पर आयोजित हो रही वेबिनारों की बाढ़ है। कानूनी पेशे में परिचर्चा और परामर्श की यह लहर निस्संदेह मियादी है और लॉकडाउन समाप्त होने के बाद संभवतः खत्म हो जाए। जब सभी दोबारा व्यस्त हो जाएंगे, युवा वकीलों को, आज जिस उदारता से दी जा रही है, उसकी अपेक्षा, तब मेंटर‌श‌िप की अध‌िक आवश्यकता होगी।

पिछले 15 वर्षों में, पहले कानून के छात्र के रूप में और बाद में एक वकील के रूप में, मैंने उच‌ित प्रकार की मेंटरशिप प्राप्त करने के महत्व के बारे में कम ही सीखा है। मुझे लगा कि मैंने जो सीखा है, उसे साझा करके मैं दूसरों की मदद कर सकता हूं।

इन वर्षों में, मैंने कई वकीलों से मुलाकात की है, जिनमें साहस, नेतृत्व क्षमता, लचीलापन और ‌विवेक रहा है। उन्होंने मुझे प्रेरित किया है और कठिन परिस्थितियों में मशविार भी द‌िया है। आपने इनमें से कई वकीलों के बारे में ज्यादा नहीं सुना होगा। ऐसा इसलिए नहीं है कि वे प्रसिद्धि के लायक नहीं हैं, बल्कि इसलिए कि वे अपना काम, एक ऐसे पेशे में जो कि भाई-भतीजावाद, प्रणालीगत पैठ की बाधाओं, असमानताओं और अस्वीकृतियों से भरा है, में अदृश्य और शांत गरिमा के साथ करते हैं। वे पूर्ण नहीं हैं और न ही वीर हैं, बल्कि वे बेहद शानदार पुरुष और महिला हैं।

युवा वकीलों के रूप में, हमें कई कारणों से एक मेंटर की आवश्यकता होती है। अगर हम पढ़ने और कानून को समझने में बहुत अच्छे हैं तो भी हमारे पास अक्सर यह अनुभव कम ही होता है कि हम यह समझ पाएं कि घटनाएं कैसे सामने आएंगी, ग्राहक कैसे व्यवहार करेंगे या न्यायाधीश या नियामक कैसे प्रतिक्रिया देंगे। जब हम अप्रत्याशित स्थितियों का सामना करते हैं, तो हम घबरा जाते हैं, या फिर दाएं-बाएं झांकने लगते हैं। यदि आप मेरी तरह हैं, तो आप दिन में तीन बार घबरा सकते हैं। आप दुनिया के अन्याय के बारे में सोशल मीडिया पर भी नाराजगी जता सकते हैं। मेरा विश्वास करिए, दरअसल इससे बहुत कुछ हासिल नहीं होता है।

ज्यादा खतरनाक यह है कि यदि हम दबावों को का समाना नहीं कर पाते हैं तो या तो कुछ गलत कर बैठते हैं या फिर पेशा छोड़ देते हैं। इससे भी बदतर यह है कि, हम अनैतिक साधनों का सहारा लेने की कोशिश करते हैं। अच्छी मेंटरश‌िप हमें अनुभवहीनता से पार पाने और हमारी परेशानियों को कम करने मदद करती है। सही मेंटरशिप पाने के लिए, बस आपको अपने आसपास के वकीलों को प्रति चौकस, सम्मानजनक, सच्चा और विनम्र होना चाहिए। यह मेरा अनुभव रहा है और मुझे उम्मीद है कि यह आपका भी हो सकता है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं जो आपकी मदद कर सकते हैं।

मेंटरश‌िप के प्रकार

मेंटरशिप की तलाश में मेंटरों की तलाश को जन्म देती है। मेंटर्स भी इंसान हैं, इंसानों को अलग-अलग तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है। सबसे बुनियादी लेकिन उपयोगी वर्गीकरण उन्हें मृत, वृद्ध और युवा बांटना हैं। बूढ़े और युवा के बीच, एक और श्रेणी है, जिसे अरुंधति रॉय ने कलात्मक रूप से "बूढ़े नहीं, बल्कि एक व्यवहार्य-व्यर्थ उम्र" के रूप में वर्णित किया है। इन सभी श्रेणियों में मेंटर उपलब्ध हैं, और प्रत्येक श्रेणी हमें एक अलग तरह की मेंटरशिप प्रदान करती है। मेरा हर तरह की मेंटर‌शिप से समाना रहा है और सीख से बहुत फायदा हुआ है।

मृत वकीलों की संख्या जीवितों से ज्यादा होने की संभावना है। मृतकों से सीखने के लिए, एक को उन्नत तकनीक की आवश्यकता होती है: किताबें, दिमाग और पढ़ने की प्रेरणा। सौभाग्य से, किताबें और दिमाग उपलब्ध हैं। भारतीय वकीलों, जजों और उनकी जिंद‌गियों पर आधारित कुछ शानदार किताबें और आत्मकथाएं उपलब्‍ध हैं।

ये किताबें न केवल पढ़ने के लिए अद्भुत हैं, बल्कि हमें अतीत के सफल वकीलों के काम करने के तरीकों और नैतिकता की झलक भी देती हैं। कृपया उन्हें खोजें और पढ़ें। मृतकों से सीखने का फायदा यह है कि उनके पास हमसे साधने के लिए कोई स्वार्थ नहीं है। व्यक्तिगत रूप से, जब मैं कानून का छात्र था, मैंने नानी पालखीवाला के कामों को खूब प्रेरक और शिक्षाप्रद पाया है। भारतीय कानून के छात्रों को शुरुआत के लिए वह एक शानदार व्यक्ति हो सकते हैं। यदि आपके पास कल्पना की शक्ति है, तो किताबों के पात्र वास्तविक लगेंगे। मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप अपने पसंदीदा मृत वकीलों को खोजें, उन्हें पढ़ें और उनसे सीखें।

पुराने वकीलों के भी संस्मरण हैं। आखिरकार, चीजों को करने का उचित तरीका यह है कि पहले संस्मरण लिखा जाए और और फिर मरा जाए। पुराने वकीलों को व्याख्यान देने और कई प्रकार के मुद्दों पर अपनी अंतर्दृष्टि का लेख के रूप में योगदान देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। ये व्याख्यान और लेख अब व्यापक रूप से सोशल मीडिया पर प्रसारित और आसानी से उपलब्ध हैं। पुराने वकीलों के संस्मरण और भाषण, मृत वकीलों के संस्मरणों से महत्वपूर्ण तरीके से भिन्न होते हैं।

आप कई पुराने वकीलों को अभी भी देश भर के कोर्ट रूम, लॉ फर्म, बोर्ड रूम, सिविल सोसाइटी संगठनों और अन्य पेशेवर सेटिंग्स में भाग लेते हुए देख सकते हैं। इससे हमें न केवल वे जो कहते हैं, उसे पढ़ने और सुनने का अवसर मिलता है, बल्कि वे जो करते हैं उसका अवलोकन भी करते हैं। यह आशीर्वाद और अभिशाप दोनों है, क्योंकि लोग अक्सर अपने संस्मरणों और भाषणों में कुछ बहुत ही शानदार कहते हैं और वास्तविक जीवन में कुछ अलग करते हैं। जब मैं वकीलों कथनी और करनी के बीच अंतर पाता हूं मो मैं कोशिश करता हूं कि इससे नाराज न होंऊं और न ही उन्हें इसके लिए जज करूं।

इसके बजाय, मैं इस बात पर आत्मनिरीक्षण करने की कोशिश करता हूं कि एक अच्छा वकील होना कितना मुश्किल काम है, और यह भी कि सबसे अनुभवी और प्रतिभाशाली पुरुष और महिलाएं आचरण के उच्च मानकों पर विफल कैसे हो सकते हैं, जो कि पेशे की मांग है। मैं फिर अपने आप से पूछता हूं: "मैं अपने आप को कैसे तैयार कर सकता हूं कि मैं उस तरह न लड़खड़ाऊं?"

अब "न तो बहुत-बूढ़े-न-बहुत-युवा" श्रेणी पर आते हैं। भारत में, ये वकील अपने पेशेवर जीवन के शीर्ष पर हैं। वे बेहद व्यस्त लोग हैं, जिनसे हमारा अक्सर सामना हो सकता है। आप उनके चैंबर जूनियर हो सकते हैं, वह वकील जो उन्हें मामलों पर ब्रीफ करते हैं, किसी सौदे में उनके कनिष्ठ सहयोगी, या किसी मामले मे उनके प्रतिपक्षी। जिस भी रूप में आप से मुलाकात हो, उनके पास आपको व्यक्तिगत रूप से सिखाने का समय नहीं होगा।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप उनसे सीख नहीं सकते। इस मामले में सीखने के लिए बस एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। आवश्यकता यह होती है कि जब ऐसे वकील आप के सा‌‌थ बातचीत करते हैं, और जब वे लोगों के साथ बातचीत करते हैं, तो आपको इनका बारीकी से अवलोकर करिए। इसके अलावा, यदि आप अपने काम में ईमानदार हैं और वह आपके काम दिखाई देता है, तो बहुत संभवाना है कि ऐसे वकील आपको नोटिस करें, आपको बढ़ावा दें और मार्गदर्शन करने में रुचि लें। मुझे इस श्रेणी के वकीलों से बहुत अधिक समर्थन, प्रोत्साहन और अत्यंत उपयोगी प्रतिक्रिया मिली हैं।

उसके बाद युवा वकीलों की श्रेणी है। चूंकि मैं खुद एक युवा वकील हूं, इस श्रेणी के बारे में मैं जो भी कहता हूं, वह सब मुझ पर भी लागू होती है। इस श्रेणी के साथ, मैंने पाया है कि मुझे मेंटरों की तलाश में बहुत अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। ऐसा कई कारणों से है। निस्संदेह हमारे पेशे में कई तेज, त्यधिक कुशल और बुद्धिमान युवा वकील हैं। हालांकि, चूंकि ये वकील युवा हैं, वे उत्कृष्ट वकील बनने की प्रक्रिया में बहुत आगे हैं। युवा वकील खुद बहुत सारी गलतियां करते हैं और उन्हें स्वीकार करने में अनिच्छुक हो सकते हैं। जब युवा वकीलों से सीखने की बात आती है, तो मैंने एक नियम को अत्यंत उपयोगी पाया है। अगर किसी को खुद पर बहुत यकीन है, तो उन पर ध्यान दें। कम उम्र में प्रमाण हमें अंधेरे, खतरनाक स्थानों पर ले जाता है।

सही रवैया

मेंटर्स से अच्छी तरह सीखने के लिए सही दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। शुरुआत करने के लिए विनम्रता एक अच्छी वस्तु है। आप कई विषयों पर अपने मेंटर से अधिक जान सकते हैं। आपके पास आइवी लीग विश्वविद्यालयों की फैंसी डिग्री हो सकती है। ये सब कोई मायने नहीं रखते हैं। आपके मेंटर्स आपके द्वारा किए गए काम से बेहतर जानते हैं, और आपका काम है कि आप उनसे अच्छी तरह सीखें। वे आपको तभी सिखाएंगे जब वे आपको पसंद करेंगे और आप उनके लिए अच्छे होंगे।

यह सच्चा और सक्रिय होने में भी मदद करता है। यहां तक ​​कि अगर आप शर्मीले हैं या अंतर्मुखी हैं, जैसे मैं हूं, तो भी बड़े वकीलों से चुपचाप संपर्क करने और मदद मांगने में संकोच न करें। जैसा कि बाइबल कहती है, "मांगों, और यह तुम्हें दिया जाएगा; तलाश करो, और तुम पाओगे; दस्तक दो, और यह तुम्हारे लिए खोला जाएगा।" बाइबल हमें यह भी बताती है कि "धन्य हैं विनम्र: क्योंकि वे पृथ्वी के वारिस होंगे।"

अंत में, मेंटर्स को जब आपकी जरूरत हो तब आप उपलब्‍ध रहें। यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह आत्म-व्याख्यात्मक भी है।

दो महत्वपूर्ण सावधानियां

दो सावधा‌नियां हैं, जिनके साथ मैं समाप्त करना चाहूंगा। सबसे पहले, जब मेंटर्स की तलाश में हों तो दबंगों से दूर रहें। अफसोस यह है कि , हमारे पेशे में इस विचार को काफी हद तक सामान्य कर दिया गया है कि वरिष्ठ वकील कनिष्ठों के प्रति अपमानजनक हो सकते हैं। यह कानूनी फर्मों और मुकदमेबाजी दोनों का सच है। मैंने ऐसे वकीलों की कहान‌ियां सुनी है, जिनकी भारी मांग रही, लेकिन उन्होंने काम का माहौल शत्रुतापूर्ण और अपमानजनक बनाया।

महिला वकीलों के लिए, यौन उत्पीड़न का भी खतरा है। यदि आपके साथ दुर्व्यवहार हो तो तुरंत वो जगह छोड़ दें।

आपको बुरे अंजाम की धमकी दी जाए तो भी बिलकुल अनसुना करें और वो जगह छोड़ दें। यदि वाकई आपका परिणाम से आमना-सामना हो तो आप दूसरों तक पहुंचें और मदद मांगें। आपको समर्थन देने के लिए कई मददगार हाथ मिलेंगे।

दूसरा, अपने मेंटर्स को वही समझें जो वो हैं,। वे मानव हैं और पतनशील भी। वे हीरो हो सकते हैं, लेकिन उनमें कमियों भी हो सकती हैं। अपने मेंटर्स का सम्मान करें लेकिन उनकी खामियों के प्रति सचेत रहें। मुझे आशा है, इससे आपकी थोड़ी मदद हुई होगी।

(गौतम शिवशंकर सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड हैं। उनसे [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं। उनका ट्व‌िटर हैंडल @gousgame है।)

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