तृणमूल नेताओं पर हमलों के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची पार्टी, हिंसा और सार्वजनिक अपमान पर जताई चिंता
Amir Ahmad
22 Jun 2026 4:10 PM IST

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने अपने सांसदों, विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों तथा सार्वजनिक अपमान की घटनाओं को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया कि राज्य में उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है।
सोमवार को सीनियर एडवोकेट सिरसान्या बंद्योपाध्याय ने कार्यवाहक मुख्य जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए इसकी तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिका शुक्रवार को दायर की गई थी, लेकिन उस पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई।
दलीलों पर गौर करते हुए खंडपीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई करने पर सहमति जताई।
याचिका में हाल के उन घटनाक्रमों का उल्लेख किया गया, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन, कल्याण बंद्योपाध्याय और अभिषेक बनर्जी तथा विधायक कुनाल घोष और मदन मित्रा पर कथित रूप से अंडे फेंके गए और पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसक घटनाएं हुईं।
पार्टी ने अपनी याचिका में कहा कि यह जनहित याचिका तृणमूल कांग्रेस से जुड़े लोगों के खिलाफ लक्षित सार्वजनिक हिंसा, भीड़ द्वारा हमलों और सार्वजनिक बदनामी" की घटनाओं के मद्देनजर दायर की गई।
याचिका में दावा किया गया कि इन घटनाओं से कानून के शासन, संवैधानिक स्वतंत्रताओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। पार्टी का आरोप है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसा, दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
तृणमूल कांग्रेस ने राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
याचिका के अनुसार पार्टी से जुड़े लोगों को बार-बार सार्वजनिक अपमान और शारीरिक हमलों का सामना करना पड़ा है। इसमें आरोप लगाया गया कि कई मौकों पर उन पर अंडे, स्याही और पत्थर फेंके गए।
पार्टी ने यह भी दावा किया कि कुछ गंभीर मामलों में उसके कार्यकर्ताओं और नेताओं को कथित रूप से रोका गया, पीटा गया, जबरन घुमाया गया और भीड़ द्वारा प्रताड़ित किया गया।

