सूचना का अधिकार मौलिक अधिकार, 15 दिन में जवाब दें: कलकत्ता हाईकोर्ट का सख्त निर्देश

Amir Ahmad

10 April 2026 1:36 PM IST

  • सूचना का अधिकार मौलिक अधिकार, 15 दिन में जवाब दें: कलकत्ता हाईकोर्ट का सख्त निर्देश

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार (RTI) संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) से उत्पन्न मौलिक अधिकार है और इसमें देरी स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने पश्चिम बंगाल सूचना आयोग के राज्य लोक सूचना अधिकारी को लंबित आरटीआई आवेदन का निपटारा 15 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया।

    जस्टिस राय चट्टोपाध्याय इस मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता ने वर्ष 2018 में मांगी गई जानकारी समय पर न मिलने और सूचना आयोग की कार्यवाही को चुनौती दी थी।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा,

    “सूचना का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) से उत्पन्न एक मौलिक अधिकार है।”

    साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि RTI कानून इस अधिकार को पैदा नहीं करता, बल्कि इसे लागू करने की व्यवस्था प्रदान करता है और पारदर्शिता को लोकतंत्र का आधार बनाता है।

    मामले की पृष्ठभूमि में, याचिकाकर्ता ने 10 अक्टूबर 2018 को एक स्कूल से सूचना मांगी थी, लेकिन निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला। इसके बाद उसने प्रथम और द्वितीय अपील दायर की। हालांकि, बाद में सूचना उपलब्ध करा दी गई, लेकिन काफी देरी से।

    याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि नियमों के अनुसार स्कूल के रिकॉर्ड का संरक्षक संस्था का प्रमुख होता है, लेकिन व्यवहार में सहायक प्रधानाध्यापक को लोक सूचना अधिकारी बना दिया जाता है, जिससे जानकारी देने में बाधा आती है।

    हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया कि लोक सूचना अधिकारी यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि उसके पास रिकॉर्ड नहीं है। कानून के तहत उसका कर्तव्य है कि वह संबंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त कर आवेदक को उपलब्ध कराए।

    अदालत ने यह भी पाया कि 2 जनवरी, 2020 को दायर एक अन्य RTI आवेदन अब तक लंबित है। इस पर सख्ती दिखाते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी 15 दिनों के भीतर इस आवेदन का निपटारा करे।

    अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक व्यवस्था और वैधानिक प्रावधानों में सामंजस्य जरूरी है, ताकि सूचना प्राप्त करने में आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो।

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