ममता बनर्जी की चुनाव याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट की मुहर, EVM-VVPAT और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
Amir Ahmad
23 Jun 2026 4:30 PM IST

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को ममता बनर्जी की उस चुनाव याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया, जिसमें उन्होंने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से सुवेंदु अधिकारी के निर्वाचन को चुनौती दी। अदालत ने माना कि याचिका में प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य आधार मौजूद हैं और यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की आवश्यकताओं को पूरा करती है।
जस्टिस गौरांग कांत ने याचिका को प्रारंभिक चरण में खारिज करने से इनकार करते हुए निर्वाचन आयोग, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी को चुनाव से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), मतदाता सत्यापन योग्य कागजी पर्ची प्रणाली (VVPAT) और CCTV फुटेज को तत्काल सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
ओपन कोर्ट में आदेश सुनाते हुए जस्टिस गौरांग कांत ने कहा कि अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि चुनाव याचिका जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप है और इसे खारिज करने का कोई आधार नहीं बनता।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा अंतरिम राहत की मांग और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग अलग-अलग प्रकृति की हैं। साक्ष्यों के संरक्षण का मुद्दा विशेष महत्व रखता है।
खंडपीठ ने कहा कि CCTV फुटेज इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य है, जो समय बीतने के साथ स्वतः मिट सकता है या उसके ऊपर नया डेटा दर्ज हो सकता है। वहीं EVM और VVPAT इस विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन सामग्रियों को सुरक्षित रखने का आदेश मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं है और इससे किसी पक्ष को कोई नुकसान नहीं होगा।
अदालत ने कहा,
"यदि इन साक्ष्यों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो महत्वपूर्ण प्रमाणों की अपूरणीय क्षति हो सकती है।"
इसी आधार पर अदालत ने निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी को निर्देश दिया कि अगला आदेश आने तक CCVT फुटेज, EVM और VVPAT सुरक्षित रखे जाएं।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत की अनुमति के बिना इन सामग्रियों को न तो मिटाया जाएगा, न बदला जाएगा, न नष्ट किया जाएगा और न ही किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंद्योपाध्याय ने मामले के शीघ्र निस्तारण का अनुरोध करते हुए कहा कि चुनाव याचिका पर यथासंभव जल्द फैसला होना चाहिए।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद निर्धारित की।

