पश्चिम बंगाल बुल्डोजर राज्य नहीं: ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट में उठाया चुनाव बाद हिंसा का मुद्दा

Amir Ahmad

14 May 2026 1:28 PM IST

  • पश्चिम बंगाल बुल्डोजर राज्य नहीं: ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट में उठाया चुनाव बाद हिंसा का मुद्दा

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद कथित हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है बुलडोजर कार्रवाई की गई और पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही है।

    गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में सत्ता हासिल की है और सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।

    मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने की।

    एक याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 4 मई की रात कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में कथित बुलडोजर कार्रवाई की गई।

    सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने अदालत में कहा,

    “तस्वीरें देखिए। बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया। महिलाओं और अल्पसंख्यकों को भी नहीं बख्शा गया। कई घरों में तोड़फोड़ हुई। लोग भारी परेशानी में हैं। कृपया पुलिस को सही तरीके से काम करने के निर्देश दें। FIR तक दर्ज नहीं होने की जा रही है।”

    उन्होंने आगे कहा,

    “मेरी विनम्र प्रार्थना है कि बंगाल के लोगों की रक्षा की जाए। यह बुल्डोजर राज्य नहीं है।”

    तृणमूल कांग्रेस की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंद्योपाध्याय ने दलील दी कि पार्टी के कई कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई और कार्यकर्ताओं पर हमले हुए।

    उन्होंने कहा,

    “हमारे कार्यकर्ताओं को घर छोड़ने पर मजबूर किया गया। भय का माहौल बना हुआ है। महिलाओं पर खुलेआम हमले हो रहे हैं।”

    उन्होंने वर्ष 2021 की चुनाव बाद हिंसा की तरह एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की। साथ ही घर छोड़ने को मजबूर लोगों की सुरक्षित वापसी, आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश देने की अपील की।

    उन्होंने अदालत से यह भी कहा,

    “बिना कानून का पालन किए या अदालत की अनुमति के पश्चिम बंगाल में बुल्डोजर कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। हम उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं।”

    वहीं राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अशोक चक्रवर्ती ने कहा कि अदालत को पहले याचिकाओं के तथ्यों की जांच करनी चाहिए।

    पुलिस की ओर से पेश डिप्टी-सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने कहा कि याचिकाओं में लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं तथा बिना सत्यापन वाली तस्वीरों के आधार पर अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती।

    उन्होंने कहा,

    “किस तारीख को क्या घटना हुई, हमलावर कौन थे, शिकायतकर्ता कौन हैं? बिना किसी सबूत के जनहित याचिका में इस तरह के आरोप नहीं लगाए जा सकते।”

    त्रिवेदी ने कहा कि न्यू मार्केट में सड़क किनारे अवैध निर्माण था और बुल्डोजर कार्रवाई राज्य सरकार ने नहीं बल्कि निजी लोगों ने की थी। उन्होंने बताया कि इस मामले में FIR दर्ज कर नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया।

    उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को याचिका की प्रति केवल एक दिन पहले मिली है और यदि कोई घटना सामने आती है तो FIR दर्ज की जाएगी।

    इस पर कल्याण बंद्योपाध्याय ने कहा कि यदि पुलिस को इन घटनाओं की जानकारी नहीं है तो इसका मतलब है कि वह काम नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में तोड़फोड़ और फरार कार्यकर्ताओं का पूरा विवरण याचिका में दिया गया।

    उधर तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी सिरसान्या बंद्योपाध्याय ने भी चुनाव परिणामों के बाद कथित हिंसा, पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ और कार्यकर्ताओं पर हमलों को लेकर हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    इसके अलावा विधायक हुमायूं कबीर की एजेयूपी पार्टी ने भी मुर्शिदाबाद में कथित चुनाव बाद हिंसा को लेकर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।

    सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत संबंधी आदेश सुरक्षित रख लिया।

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