राजनीतिक भाषण मामले में विधायक हुमायूं कबीर को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

Amir Ahmad

11 Sept 2026 12:23 PM IST

  • राजनीतिक भाषण मामले में विधायक हुमायूं कबीर को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

    पश्चिम बंगाल के आम जनता उन्नयन पार्टी के विधायक हुमायूं कबीर को कथित राजनीतिक भाषण से जुड़े मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली। हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दी।

    कोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत अपराध के प्रथम दृष्टया आवश्यक तत्व मामले में दिखाई नहीं देते और कबीर से हिरासत में पूछताछ की जरूरत भी नहीं है।

    जस्टिस अजय कुमार गुप्ता ने 10 सितंबर को हुमायूं कबीर की अग्रिम जमानत याचिका पर यह आदेश पारित किया।

    बता दें, मामला रेजीनगर थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है। पुलिस ने 27 जून 2026 को BNS की धारा 152, 192, 196, 197, 224, 299, 351(2), 352 और 353 के तहत मामला दर्ज किया था। यह मामला मुर्शिदाबाद के बहरमपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित है।

    कबीर की ओर से दलील दी गई कि वह राजनीतिक नेता, विधायक और सार्वजनिक व्यक्ति हैं तथा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया। उनके वकील ने कहा कि धारा 152 के तहत अपराध के जरूरी तत्व पूरे नहीं होते। वहीं, उनके खिलाफ लगाई गई अन्य धाराओं में अधिकतम सजा पांच वर्ष तक की है।

    अदालत को बताया गया कि कबीर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत जांच में शामिल होने के लिए दो नोटिस दिए गए और वह दोनों बार जांच में शामिल हुए। पहली बार उनसे करीब चार घंटे और दूसरी बार करीब पांच घंटे पूछताछ की गई। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि वह जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

    कबीर के वकील ने हाईकोर्ट की अन्य पीठ के 19 अगस्त 2026 के आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें एक अन्य मामले में उनकी अग्रिम जमानत मंजूर की गई। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के 2026 के एक फैसले का उल्लेख करते हुए दलील दी गई कि सात वर्ष से कम सजा वाले अपराधों में, यदि आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है तो गिरफ्तारी सामान्य स्थिति नहीं होनी चाहिए और ऐसे मामलों में गिरफ्तारी अपवाद के तौर पर ही होनी चाहिए।

    राज्य सरकार ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। राज्य की ओर से मामले की केस डायरी और साक्ष्यों से संबंधित दस्तावेज अदालत के सामने रखे गए। सरकार ने दलील दी कि कबीर ने एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए कथित तौर पर धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया और विशेष रूप से एक राजनीतिक दल तथा सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाया। इसलिए उनके खिलाफ धारा 152 लागू होती है।

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