अंडे फेंकने और आरोपियों की सार्वजनिक परेड की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए : कलकत्ता हाईकोर्ट

Amir Ahmad

8 July 2026 1:10 PM IST

  • अंडे फेंकने और आरोपियों की सार्वजनिक परेड की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए : कलकत्ता हाईकोर्ट

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास को अलीपुर अदालत परिसर में कथित अंडे फेंके जाने की घटना से जुड़े मामले में अंतरिम राहत देते हुए कहा कि आरोपियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और उन पर अंडे फेंकने जैसी प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।

    जस्टिस सौगत भट्टाचार्य अरूप विश्वास की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी।

    यह FIR उस घटना के बाद दर्ज की गई थी जब एक अन्य मामले में अदालत में पेशी के दौरान उन पर कथित रूप से अंडे फेंके गए।

    अरूप विश्वास की ओर से सीनियर एडवोकेट किशोर दत्ता ने दलील दी कि यह घटना न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप है और इसे आपराधिक अवमानना के रूप में देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा,

    "वकीलों के हाथ में अंडे थे। इस पेशे का हिस्सा होने के नाते मुझे शर्म महसूस होती है। मैं यह दलील दूंगा कि यह न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप है और आपराधिक अवमानना का मामला बनता है।"

    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अदालत परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था और आरोपियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने का मुद्दा पहले से ही चीफ जस्टिस के समक्ष लंबित एक जनहित याचिका में विचाराधीन है।

    अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस संबंध में एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार किए जाने की बात सामने आई है।

    सीनियर एडवोकेट किशोर दत्ता ने कहा कि ऐसी घटनाएं पुलिस की मौजूदगी में खुलेआम हो रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके मुवक्किल ने जांच में पूरा सहयोग किया लेकिन इसके बावजूद यह घटना हुई।

    इस पर अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,

    "आरोपियों की सार्वजनिक परेड हो या उन पर अंडे फेंकने की घटना, इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।"

    दत्ता ने यह भी कहा कि घटना के समय बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी मौजूद थे और पूरा घटनाक्रम व्यापक रूप से प्रसारित हुआ। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मीडिया को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि घटना की परिस्थितियों को सामने रखना है।

    FIR पर सवाल उठाते हुए दत्ता ने कहा कि शिकायत 24 घंटे की देरी से दर्ज की गई, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है।

    उन्होंने यह भी दलील दी कि हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और महिला की लज्जा भंग करने जैसे आरोप इस मामले में टिक नहीं सकते।

    हालांकि अदालत ने कहा कि अरूप विश्वास पहले से ही अंतरिम संरक्षण का लाभ ले रहे हैं।

    अदालत ने उन्हें शिकायतकर्ता को पक्षकार बनाने, उसे नोटिस देने और अगली सुनवाई पर उपस्थित होने का निर्देश दिया।

    अदालत ने कहा,

    "आपको पहले से संरक्षण प्राप्त है। शिकायतकर्ता को पक्षकार बनाइए, नोटिस दीजिए और अगली तारीख पर आइए।"

    दत्ता ने अगली सुनवाई तक किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया।

    इस पर अदालत ने अंतरिम राहत जारी रखते हुए निर्देश दिया कि "तब तक कोई कदम न उठाया जाए।"

    इसके साथ ही अदालत ने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया।

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