नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है मस्जिद जाना जरूरी नहीं': कोलकाता एयरपोर्ट में नमाज फिर शुरू करने की मांग का AAI ने हाईकोर्ट में किया विरोध

  • नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है मस्जिद जाना जरूरी नहीं: कोलकाता एयरपोर्ट में नमाज फिर शुरू करने की मांग का AAI ने हाईकोर्ट में किया विरोध

    कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित बांकरा मस्जिद में नमाज फिर शुरू करने की अंतरिम अनुमति देने का भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने कलकत्ता हाईकोर्ट में विरोध किया। AAI ने कहा कि मस्जिद सार्वजनिक भूमि पर स्थित है और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विमानन सुरक्षा से जुड़े गंभीर कारणों को देखते हुए वहां लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई।

    जस्टिस कृष्ण राव बांकरा मस्जिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। कमेटी ने मस्जिद में नमाज पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देते हुए लंबित याचिका के अंतिम निपटारे तक वहां फिर से नमाज की अनुमति देने की मांग की।

    AAI की ओर से सीनियर एडवोकेट एस.एन. मुखर्जी ने दलील दी कि मस्जिद जिस जमीन पर स्थित है, वह सार्वजनिक भूमि है और एयरपोर्ट से संबंधित उद्देश्यों के लिए पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि नमाज अदा करने के लिए किसी विशेष मस्जिद में जाना अनिवार्य नहीं है।

    वकील ने कोर्ट से कहा,

    “एयरपोर्ट सार्वजनिक भूमि है। नमाज के लिए मस्जिद जाना अनिवार्य नहीं है। नमाज कहीं भी पढ़ी जा सकती है।”

    AAI की ओर से कहा गया कि एयरपोर्ट के विस्तार के लिए यह जमीन दशकों पहले अधिग्रहित की गई और इस संबंध में 7 फरवरी 1961 की अधिसूचना का भी हवाला दिया गया। प्राधिकरण के अनुसार जमीन स्थानीय निवासियों से अधिग्रहित की गई थी और मस्जिद से संबंधित भूमि के लिए मुआवजा भी दिया गया।

    इस पर हाईकोर्ट ने AAI के वकील से जमीन के मूल मालिकों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। जवाब में बताया गया कि संपत्ति स्थानीय निवासियों से अधिग्रहित की गई थी और उनके पुनर्वास तथा मुआवजे की व्यवस्था की गई।

    AAI ने यह भी दलील दी कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार किसी व्यक्ति को किसी विशेष स्थान पर ही धार्मिक गतिविधि करने का अधिकार नहीं देता, खासकर तब जब राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल जुड़ा हो।

    प्राधिकरण ने कहा कि मस्जिद तक पहुंच प्रतिबंधित करने का फैसला अचानक नहीं लिया गया था। उसके अनुसार, नागरिक विमानन अधिकारियों ने 13 मई 2026 को एयरपोर्ट प्राधिकरण को सुरक्षा संबंधी कमियों को लेकर पत्र भेजा था। इसके बाद 23 मई को सभी संबंधित पक्षों की बैठक हुई, जिसमें बांकरा मस्जिद कमेटी के सदस्य भी मौजूद थे।

    AAI ने कहा कि एयरपोर्ट क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और विमानन सुरक्षा को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। इनमें विमान संचालन से जुड़े पहलू भी शामिल थे। इन सभी पक्षों के विचारों पर विचार करने के बाद एयरपोर्ट के गेट से मस्जिद तक पहुंच रोकने का फैसला लिया गया।

    AAI की ओर से कहा गया,

    “यह फैसला रातोंरात नहीं लिया गया। सभी संबंधित पक्षों की राय सुनी गई। इसमें राष्ट्रीय और विमानन सुरक्षा का सवाल जुड़ा है।”

    प्राधिकरण ने बड़े सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए धार्मिक स्थलों की जमीन के अधिग्रहण को कानूनी रूप से संभव बताते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान मंदिरों और चर्चों से संबंधित भूमि प्रभावित होने के उदाहरण भी दिए।

    केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने भी अंतरिम राहत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि संविधान में मस्जिद को भूमि अधिग्रहण से अलग कोई विशेष छूट नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि एयरपोर्ट के रनवे के नजदीक मस्जिद की स्थिति गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा करती है।

    केंद्र की ओर से 2019 की प्रधानमंत्री कार्यालय की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया। दलील दी गई कि यदि मस्जिद मौजूदा स्थान पर बनी रहती है तो एयरपोर्ट का विस्तार संभव नहीं होगा।

    केंद्र ने यह भी कहा कि मस्जिद को विरासत स्थल का दर्जा प्राप्त नहीं है और एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में मौलिक अधिकारों को सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

    दूसरी ओर, याचिकाकर्ता बांकरा मस्जिद कमेटी की ओर से कहा गया कि इस मस्जिद में करीब 136 वर्षों से नमाज अदा की जाती रही है और इस दौरान सुरक्षा से जुड़ी कोई घटना नहीं हुई। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि पहले नमाज के लिए आने वाले लोगों की सुरक्षा जांच की जाती थी और इसके बाद उन्हें मस्जिद तक जाने दिया जाता था।

    मस्जिद कमेटी एयरपोर्ट परिसर में स्थित मस्जिद में नमाज बंद करने के 11 जुलाई 2026 के फैसले को चुनौती दे रही है। कमेटी ने हाईकोर्ट से मुख्य याचिका पर अंतिम फैसला आने तक वहां नमाज फिर शुरू करने की अंतरिम अनुमति मांगी है।

    इससे पहले भी हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विमानन सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए मस्जिद में नमाज की अंतरिम अनुमति देने से इनकार किया था।

    मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

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