गोवा सरकार पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, 'शिवाजी महाराज' की अवैध मूर्ति हटाने का आदेश
Amir Ahmad
8 April 2026 4:51 PM IST

गोवा में स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे तुरंत हटाने का आदेश दिया। हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने कहा कि यह मूर्ति स्थानीय कानूनों का घोर उल्लंघन करते हुए मुरमुगांव पोर्ट प्राधिकरण की जमीन पर अवैध रूप से स्थापित की गई है।
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान गोवा सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि राज्य इस पूरे मामले में मात्र मूक दर्शक बना रहा जो बेहद चिंताजनक है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा,
“जहां कानून-व्यवस्था का सवाल हो वहां राज्य और उसकी एजेंसियों का कर्तव्य है कि वे स्थिति को नियंत्रित करें और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें। इस मामले में पोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण हुआ और राज्य ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।”
मुरमुगांव पोर्ट प्राधिकरण ने अपनी याचिका में बताया था कि वास्को-डि-गामा क्षेत्र में उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर मूर्ति स्थापित की गई, जिसकी शिकायत कई बार पुलिस और प्रशासन से की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि इस कार्य में स्थानीय विधायक संकल्प आमोनकर उनकी पत्नी और कुछ पार्षदों का समर्थन है।
अदालत ने एक समाचार वीडियो का भी संज्ञान लिया, जिसमें मूर्ति का अनावरण स्थानीय विधायक और अन्य राजनीतिक व्यक्तियों की मौजूदगी में किया गया। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह घटना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच स्पष्ट मिलीभगत का संकेत देती है।
गोवा सरकार ने दलील दी थी कि जमीन पोर्ट प्राधिकरण की है, इसलिए उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की है।
इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा,
“क्या राज्य हर ऐसे मामले में यही कहेगा कि केंद्रीय संस्थानों की संपत्ति की रक्षा उसकी जिम्मेदारी नहीं है यह तर्क स्वीकार्य नहीं है।”
अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस को शिकायत के आधार पर आपराधिक अतिक्रमण का मामला दर्ज करना चाहिए, जो कि एक संज्ञेय अपराध है।
हाईकोर्ट ने दक्षिण गोवा के पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर, कार्यपालक मजिस्ट्रेट और संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पोर्ट प्राधिकरण को पूरा सहयोग दें और पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराएं ताकि मूर्ति और उससे जुड़े सभी ढांचे को हटाया जा सके।
इसके साथ ही अदालत ने मुरमुगांव नगर परिषद की भूमिका पर भी सवाल उठाए और इस मामले में आगे की सुनवाई 4 मई को तय की। विधायक संकल्प आमोनकर और उनकी पत्नी को भी इस मामले में पक्षकार बनाते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

