महिला सहकर्मी को घूरना अशोभनीय, पर वोयूरिज्म नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
Amir Ahmad
10 April 2026 5:52 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना भले ही अनुचित और नैतिक रूप से गलत आचरण हो, लेकिन इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354-सी के तहत वोयूरिज्म का अपराध नहीं माना जा सकता।
जस्टिस अमित बोरकर ने 8 अप्रैल के आदेश में मुंबई के बोरीवली थाने में दर्ज FIR रद्द करते हुए यह स्पष्ट किया कि धारा 354-सी का दायरा सीमित है और इसे हर तरह के आपत्तिजनक व्यवहार पर लागू नहीं किया जा सकता।
मामला एक महिला कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज किया गया, जिसमें आरोप था कि आरोपी सहकर्मी उसे अकेले बैठकों में बुलाने का दबाव बनाता था, काम के दौरान अपमानित करता था, सामान्य तरीके से नजर मिलाने के बजाय उसके सीने की ओर घूरता था और अनुचित टिप्पणियां करता था।
अदालत ने कहा कि धारा 354-सी तभी लागू होती है, जब कोई व्यक्ति किसी महिला को उसके निजी क्षणों में देखे या उसकी तस्वीर/वीडियो बनाए, जहां उसे गोपनीयता की अपेक्षा हो जैसे निजी अंगों का प्रदर्शन, शौचालय का उपयोग या ऐसा कोई कार्य जो सामान्यतः सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाता।
अदालत ने कहा,
“सिर्फ घूरना, भले ही वह आपत्तिजनक हो, इसे वोयूरिज्म नहीं कहा जा सकता। कानून को उसके स्पष्ट शब्दों से आगे बढ़ाकर नहीं पढ़ा जा सकता।”
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत में कहीं यह नहीं बताया गया कि आरोपी ने महिला को किसी निजी क्रिया के दौरान देखा या उसकी कोई रिकॉर्डिंग की।
अदालत ने कहा कि आरोपी का व्यवहार अपमानजनक और कार्यस्थल पर अनुचित हो सकता है लेकिन यह धारा 354-सी के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
अदालत ने टिप्पणी की,
“हर कार्यस्थल विवाद को आपराधिक मामले में बदलना उचित नहीं है। यहां आरोप घूरने और अपमानजनक व्यवहार तक सीमित हैं जो इस धारा के दायरे में नहीं आते।”
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में वोयूरिज्म के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं, इसलिए FIR जारी रखना कानून के दुरुपयोग के समान होगा।
अंततः हाईकोर्ट ने FIR रद्द की।

