सोहराबुद्दीन कथित फर्जी मुठभेड़ मामला: 22 पुलिसकर्मियों की बरी होने के खिलाफ दायर अपील हाईकोर्ट ने की खारिज

Amir Ahmad

7 May 2026 12:34 PM IST

  • सोहराबुद्दीन कथित फर्जी मुठभेड़ मामला: 22 पुलिसकर्मियों की बरी होने के खिलाफ दायर अपील हाईकोर्ट ने की खारिज

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में 22 पुलिसकर्मियों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज किया।

    चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने गुरुवार को खुले न्यायालय में यह फैसला सुनाया।

    ये अपीलें सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन द्वारा दायर की गई थीं, जिनमें स्पेशल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें गुजरात के 22 पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया गया।

    सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पिछले वर्ष नवंबर में अदालत को बताया था कि उसने विशेष अदालत के फैसले को “स्वीकार” कर लिया।

    यह मामला लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना रहा। मुकदमे के दौरान कुल 210 अभियोजन गवाहों में से 92 गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए।

    अभियोजन के अनुसार, नवंबर 2005 में गुजरात और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने कथित तौर पर सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी का अपहरण कर फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी थी। एक वर्ष बाद उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी हत्या कर दी गई थी।

    मामले की जांच के दौरान CBI ने गुजरात और राजस्थान पुलिस के कई सीनियर अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। केंद्रीय एजेंसी ने भाजपा नेता और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी आरोपी बनाया था। बाद में दिसंबर 2014 में उन्हें मामले से रिहा कर दिया गया।

    मामले में कुल 38 आरोपियों में से 16 पहले ही विभिन्न चरणों में आरोपमुक्त हो चुके थे। ट्रायल का सामना कर रहे 22 आरोपी गुजरात और राजस्थान पुलिस के निरीक्षक तथा कांस्टेबल स्तर के अधिकारी थे।

    सुनवाई के दौरान कुछ महत्वपूर्ण गवाहों, जिनमें तुलसीराम प्रजापति की मां और सोहराबुद्दीन के भाई भी शामिल थे, ने अदालत में बयान देने से इनकार किया। उनका कहना था कि उन्हें अदालत और अभियोजन प्रक्रिया पर भरोसा नहीं रह गया, क्योंकि कई आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी थी।

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