UAPA की वैधता बरकरार: बॉम्बे हाइकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज की

Amir Ahmad

2 May 2026 12:34 PM IST

  • UAPA की वैधता बरकरार: बॉम्बे हाइकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज की

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने वाले अपने पूर्व निर्णय के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज की। अदालत ने कहा कि फैसले में कोई प्रत्यक्ष विधिक त्रुटि नहीं है और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए आधार अपील के लिए उपयुक्त हैं पुनर्विचार के लिए नहीं।

    जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने यह आदेश भीमा-कोरेगांव एल्गार परिषद मामले के कथित गवाह अनिल बाबुराव बैले की पुनर्विचार याचिका पर पारित किया।

    बैले ने वर्ष 2021 में UAPA की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कहा था कि अधिनियम के लागू होने की तिथि की अधिसूचना घोषित नहीं की गई तथा इसके नाम में प्रयुक्त 'रोकथाम' शब्द से स्पष्ट है कि यह केवल रोकथाम के लिए है दंडात्मक कार्रवाई के लिए नहीं। हालांकि, हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2025 को यह याचिका खारिज करते हुए UAPA को वैध ठहराया।

    अब पुनर्विचार याचिका में बैले की ओर से एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने दलील दी कि अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद कुछ सामग्री पर विचार नहीं किया। इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता जिन आधारों पर पुनर्विचार मांग रहा है, वे अपील के विषय हैं और उसे सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस गडकरी ने कहा,

    “हमसे कोई गलती हुई हो सकती है। कानून की व्याख्या में त्रुटि भी हो सकती है लेकिन वह पुनर्विचार का नहीं बल्कि अपील का आधार हो सकता है।”

    जस्टिस नीला गोखले ने भी कहा,

    “लगभग हर तर्क पर विचार किया जा चुका है। आपके सभी तर्कों और रिकॉर्ड की सामग्री पर हमने विचार किया है। अब जो आधार उठाए जा रहे हैं, वे अपील के लिए उपयुक्त हैं।”

    याचिकाकर्ता की इस दलील पर कि सरकार ने UAPA को कभी विधिवत अधिसूचित नहीं किया और जिस अध्यादेश के जरिए इसे लाया गया था वह समाप्त हो गया।

    जस्टिस गडकरी ने टिप्पणी की,

    “60 साल बाद आप यह मुद्दा उठा रहे हैं। इतने लोगों को सजा हुई, बरी हुए और अब यह सवाल उठाया जा रहा है।”

    अदालत ने मामले को बड़ी पीठ के समक्ष भेजने की मांग भी अस्वीकार की।

    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अंतिम सुनवाई के दौरान रखे गए सभी तर्कों और सामग्री पर विचार किया जा चुका है तथा निर्णय में कोई स्पष्ट विधिक त्रुटि नहीं है। इसी आधार पर पुनर्विचार याचिका खारिज की गई।

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