प्रेम संबंध में विवाह कर संतान होने पर किशोरों को परेशान नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO FIR रद्द की
Amir Ahmad
10 April 2026 4:37 PM IST

बॉम्बे हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि प्रेम संबंध में जुड़े दो किशोर यदि विवाह कर लेते हैं और उनके संबंध से संतान जन्म लेती है तो ऐसे मामलों में पोक्सो कानून और बाल विवाह निषेध कानून के तहत उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
औरंगाबाद पीठ में जस्टिस संतोष चपलगांवकर ने राहुल सुरुषे के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। यह FIR लड़की के पिता की शिकायत पर दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि युवक ने उनकी नाबालिग बेटी से संबंध बनाकर विवाह किया।
अदालत ने पाया कि घटना के समय लड़की की उम्र 16 वर्ष 9 माह थी, जबकि युवक 18 वर्ष का था। दोनों के बीच प्रेम संबंध था और परिवार के विरोध की आशंका के कारण लड़की स्वेच्छा से युवक के साथ चली गई।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों ने साथ रहकर विवाह किया और उनके संबंध से एक बच्ची का जन्म हुआ। लड़की ने बाद में हलफनामे के माध्यम से अदालत को बताया कि वह अब बालिग हो चुकी है और अपने पति तथा बच्चे के साथ खुशहाल जीवन जी रही है।
अदालत ने कहा,
“ऐसे विशेष परिस्थितियों में जहां दो किशोर प्रेम संबंध के चलते कम उम्र में विवाह का निर्णय लेते हैं और उनके संबंध से संतान जन्म लेती है, वहां आपराधिक मुकदमा जारी रखना अनावश्यक उत्पीड़न होगा।”
पीठ ने यह भी माना कि दोनों के बीच गहरा प्रेम संबंध था और उन्होंने परिवार के विरोध के कारण घर छोड़ा। ऐसे में मुकदमे को जारी रखने से न केवल आरोपी बल्कि पीड़िता और नवजात शिशु पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने औरंगाबाद के MIDC वालुज थाने में दर्ज FIR रद्द की।

