गणेश उत्सव में ध्वनि प्रदूषण के नियमों के पालन की मांग, बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका

  • गणेश उत्सव में ध्वनि प्रदूषण के नियमों के पालन की मांग, बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका

    गणेश चतुर्थी उत्सव के दौरान डीजे, लाउडस्पीकर और ढोल-ताशों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि धार्मिक आयोजनों के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट द्वारा अगस्त 2016 में जारी किए गए निर्देशों का राज्य में प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो रहा है। खासतौर पर पुणे जिले में धार्मिक मंडलों और नागरिक समूहों के बीच इस मुद्दे को लेकर तनाव की स्थिति बनने का दावा किया गया।

    चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने अक्षय बिक्कड़ की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर 5 अक्टूबर को सुनवाई करने की सहमति दी। सीनियर एडवोकेट अनिल साखरे ने शुक्रवार को याचिका का तत्काल उल्लेख करते हुए कहा कि रिटयर जज जस्टिस अभय ओक द्वारा 2016 में महेश विजय बेडेकर बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में ध्वनि प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण को लेकर दिए गए निर्देश करीब एक दशक बाद भी पूरी तरह लागू नहीं किए जा रहे हैं।

    सुनवाई के दौरान साखरे ने कहा कि मौजूदा गणेश उत्सव के दौरान पुणे में ध्वनि प्रदूषण को लेकर कई समस्याएं सामने आईं। उन्होंने एक व्यक्ति पर ध्वनि प्रदूषण का विरोध करने पर कथित हमले का भी उल्लेख किया और कहा कि गणेश उत्सव अभी समाप्त नहीं हुआ है तथा नवरात्रि जैसे अन्य त्योहार भी नजदीक हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर को करने का निर्देश दिया।

    2016 का फैसला महाराष्ट्र में ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण, निगरानी और कमी से संबंधित था। जनहित याचिका में कहा गया कि उस फैसले के बाद राज्य सरकार ने निगरानी के लिए व्यवस्था तो बनाई, लेकिन उसके निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन अब भी संतोषजनक नहीं है।

    याचिका में कहा गया कि 2016 के फैसले में अदालत ने ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर राज्य सरकार की विफलता को दर्ज किया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि ध्वनि प्रदूषण की शिकायत मिलने पर संबंधित प्राधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए बाध्य है और शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जानी चाहिए।

    याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और शांत क्षेत्रों में परिवेशीय ध्वनि के स्तर की प्रभावी और लगातार निगरानी नहीं हो रही है। इसके अलावा कैलिब्रेटेड ध्वनि माप यंत्रों और अन्य आवश्यक उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता तथा तैनाती भी नहीं है। याचिका में कहा गया कि अगस्त 2016 के फैसले को कई वर्ष बीत जाने के बावजूद उसके निर्देशों को पूरे राज्य में समान और प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया।

    याचिका में 3 सितंबर को कार्यकर्ता विद्यानंद बापट पर गणेश चतुर्थी से पहले तेज आवाज वाले डीजे सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने के कारण कथित हमले का भी उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि पुणे और आसपास के इलाकों में नागरिक समूह ध्वनि प्रदूषण के नियमों के कथित उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और लाउडस्पीकर, लेजर लाइट तथा प्लाज्मा साउंड सिस्टम पर रोक की मांग कर रहे हैं।

    याचिका के अनुसार इस मुद्दे को लेकर नागरिक समूहों और धार्मिक मंडलों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। यदि इसका समाधान नहीं किया गया तो त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है।

    हाईकोर्ट अब 5 अक्टूबर को इस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा।

    अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story