E-20 पेट्रोल नीति पर फर्जी AI वीडियो: हाईकोर्ट ने नितिन गडकरी के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री हटाने का दिया आदेश
Amir Ahmad
5 Aug 2026 1:20 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ E-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर प्रसारित किए गए कथित फर्जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार वीडियो तथा अन्य मानहानिकारक सामग्री को हटाने का आदेश दिया।
अदालत ने प्रथम दृष्टया इन सामग्रियों को स्वतः मानहानिकारक माना।
जस्टिस आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने बुधवार (5 अगस्त) को निर्देश दिया कि गडकरी की ओर से मुकदमे में जिन सभी पोस्ट और वीडियो की पहचान की गई, उन्हें संबंधित मंचों से हटाया जाए।
साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में इसी प्रकार की कोई अन्य सामग्री सामने आती है और उसकी जानकारी गडकरी देते हैं तो उसे भी हटाया जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी चिंता जताई कि इंटरनेट पर अपमानजनक और मानहानिकारक सामग्री को तत्काल हटाने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था मौजूद नहीं है।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में लोगों को राहत पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।
गौरतलब है कि इससे पहले 28 जुलाई को जस्टिस अभय आहूजा ने नितिन गडकरी को एक्स, मेटा, गूगल और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मानहानिकारक, फर्जी और AI से तैयार सामग्री के संबंध में दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति दी थी।
याचिका में गडकरी ने कहा कि वर्ष 2003 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू किया था जिसके तहत चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल में एथेनॉलf मिलाने की नीति लागू की गई।
वर्ष 2025-26 में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E-20) का लक्ष्य हासिल किया गया, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पास है। इसी मंत्रालय ने इस नीति से जुड़े आधिकारिक बयान और स्पष्टीकरण भी जारी किए।
गडकरी ने अदालत को बताया कि वह वर्ष 2014 से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री हैं लेकिन ई-20 नीति के निर्माण या उसके क्रियान्वयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है। इसके बावजूद कुछ अज्ञात लोगों ने फर्जी और AI से तैयार सामग्री प्रसारित कर उन्हें इस नीति के लिए जिम्मेदार बताया और उनके खिलाफ अपमानजनक तथा मानहानिकारक आरोप लगाए।
याचिका के अनुसार इन पोस्टों में यह भी झूठा और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाया गया कि गडकरी और उनके परिवार के सदस्यों ने ई-20 नीति से अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त किया। इससे उनके ऊपर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, हितों के टकराव, पद के दुरुपयोग और सरकारी अधिकारों के गलत इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।
गडकरी ने अपनी याचिका में ऐसे 24 कथित मानहानिकारक पोस्टों का उल्लेख करते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी।
याचिका में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार की नीतियों या उनके सार्वजनिक जीवन पर निष्पक्ष आलोचना, बहस या असहमति को रोकना नहीं है।
उन्होंने कहा कि आपत्ति केवल उन सामग्रियों से है जो प्रथम दृष्टया झूठी, गढ़ी हुई, दुर्भावनापूर्ण, अपमानजनक और कानून की दृष्टि में स्पष्ट रूप से मानहानिकारक हैं। साथ ही AI से तैयार सामग्री ने उनकी अनुमति के बिना उनके व्यक्तित्व और प्रचार संबंधी अधिकारों का भी उल्लंघन किया।


