स्कूल जाने के लिए 30 किलोमीटर पैदल चल रहे 228 बच्चों की सुरक्षा पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, सरकार की उदासीनता पर जताई नाराजगी

Amir Ahmad

21 Aug 2026 11:41 AM IST

  • स्कूल जाने के लिए 30 किलोमीटर पैदल चल रहे 228 बच्चों की सुरक्षा पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, सरकार की उदासीनता पर जताई नाराजगी

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने सह्याद्री टाइगर रिजर्व और चांदोली राष्ट्रीय उद्यान के वन्यजीव प्रभावित इलाकों से होकर स्कूल जाने वाले 228 बच्चों की सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र सरकार और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई।

    अदालत ने कहा कि बच्चों को रोजाना करीब 30 किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल जाने के लिए मजबूर होना और उनकी सुरक्षा के लिए न्यूनतम परिवहन सुविधा तक उपलब्ध न कराना सरकार की गंभीर उदासीनता को दर्शाता है।

    जस्टिस शर्मिला देशमुख और जस्टिस नीरज धोटे की खंडपीठ ने कहा कि कम से कम 228 बच्चे रोजाना करीब चार घंटे पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं और फिर इसी रास्ते से वापस लौटते हैं।

    यह इलाका इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव की आशंका वाला है, जिससे बच्चों पर जंगली जानवरों के हमले का लगातार खतरा बना रहता है।

    अदालत ने टिप्पणी की,

    “राज्य सरकार की उदासीनता चौंकाने वाली है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल चिंता नहीं है, क्योंकि इतनी लंबी दूरी तय कर शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों के लिए न्यूनतम परिवहन सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई गई।”

    मामला एक जनहित याचिका की सुनवाई से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि स्कूली बच्चों को चांदोली राष्ट्रीय उद्यान और सह्याद्री टाइगर रिजर्व के रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है। याचिका इस वर्ष मार्च में प्रकाशित दो मराठी समाचार पत्रों की खबरों के आधार पर दायर की गई।

    इससे पहले 2 अप्रैल 2026 को तत्कालीन जस्टिस माधव जामदार की अध्यक्षता वाली पीठ ने जिला कलेक्टर और वन विभाग को एक सप्ताह के भीतर ऐसे खतरनाक स्कूलों की पहचान करने का निर्देश दिया था, जहां वन्यजीवों के हमले का खतरा है।

    अदालत ने इन बच्चों के लिए सुरक्षित स्कूल परिवहन की व्यवस्था करने और उसके साथ एक समर्पित त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात करने का भी निर्देश दिया। इसके अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जीवन रक्षक एंबुलेंस उपलब्ध कराने को कहा गया।

    हालांकि जब मामला दोबारा अदालत के सामने आया तो पीठ ने पाया कि 2 अप्रैल के आदेश का पालन ही नहीं किया गया।

    अदालत ने कहा कि आदेश जारी होने के बावजूद जिला कलेक्टर और वन विभाग ने न तो खतरनाक स्कूलों की पहचान की और न ही बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की।

    याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि कुल 228 छात्र ऐसे पांच खतरनाक स्कूलों तक पहुंचने के लिए सह्याद्री टाइगर रिजर्व क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। ये बच्चे सांगली जिले के आठ गांवों से आते हैं और लगातार वन्यजीवों के हमले के खतरे का सामना करते हैं।

    पीठ ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि 2 अप्रैल के आदेश की अनदेखी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने जिला कलेक्टर और वन विभाग को एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि उसके आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारियों की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो वह मामले को गंभीरता से लेने के लिए बाध्य होगी।

    मामले को आगे की सुनवाई के लिए 5 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया।

    यह जनहित याचिका हरीश भीमराव कांबले बनाम महाराष्ट्र राज्य से संबंधित है।

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