गणेश चतुर्थी पर 12 दिन की शराबबंदी तर्कहीन: बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकारा, कहा- अस्पताल मरीजों से भर जाएंगे
Amir Ahmad
11 Sept 2026 3:46 PM IST

गणेश चतुर्थी के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से खासकर पुणे जिले में 12 दिनों तक शराब की बिक्री पर लगाए गए व्यापक प्रतिबंध पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने ऐसी व्यापक शराबबंदी को तर्कहीन बताते हुए कहा कि केवल यह मान लेना उचित नहीं है कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा।
चीफ जस्टिस ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि अदालत ऐसी व्यापक पाबंदी की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना हो सकता है, लेकिन शराब पीने वाले प्रत्येक व्यक्ति को संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या मान लेना उचित नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि शराब पर इतने लंबे समय के लिए पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाता है तो इसके दूसरे स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।
चीफ जस्टिस ने कहा कि नियमित और शराब के आदी लोगों को अचानक शराब न मिलने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं और ऐसे हालात में अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ सकती है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि बिना किसी तर्कसंगत आधार के व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि त्योहार के दौरान कोई व्यक्ति शराब का सेवन कर उत्साह में सड़कों पर निकलता है, तो सिर्फ इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि वह कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करेगा। हालांकि, अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि शराब पी हो या नहीं, यदि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली स्थिति पैदा करता है तो उसे कानून के मुताबिक कार्रवाई का सामना करना ही होगा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि 12 दिनों की शराबबंदी पूरे महाराष्ट्र में नहीं बल्कि केवल पुणे जिले के लिए लागू की गई। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि केवल एक शहर या जिले के खिलाफ ऐसा आदेश जारी करने से सरकार आखिर क्या संदेश देना चाहती है।
खंडपीठ ने कहा कि वह पुणे के लिए इस तरह के 12 दिन के शराब प्रतिबंध के आदेश से गंभीर रूप से असहमत है। अदालत ने राज्य सरकार को मामले में उचित निर्देश लेकर आने को कहा और संकेत दिया कि ऐसा नहीं होने पर हाईकोर्ट उचित आदेश पारित कर सकता है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए सभी शराब उपभोक्ताओं को एक ही नजर से देखना और इतने लंबे समय के लिए व्यापक प्रतिबंध लगा देना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि गणेश उत्सव एक त्योहार है और लोगों को इसे मनाने की अनुमति होनी चाहिए, बशर्ते वे कानून-व्यवस्था का उल्लंघन न करें।
मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को दोपहर 3 बजे निर्धारित की गई।


