TV9 के प्रबंध निदेशकों के खिलाफ मानहानि मामले में जारी प्रक्रिया रद्द, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- नाम जोड़ने के बाद शिकायतकर्ता का बयान दोबारा दर्ज करना जरूरी
Amir Ahmad
15 Sept 2026 3:22 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने TV9 न्यूज चैनल के प्रबंध निदेशकों रवि वेलिचेटी और नरसिम्हा मंगिपुडी के खिलाफ मानहानि मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रक्रिया को रद्द किया।
मामला मुंबई पुलिस अधिकारी राजेश सावणे की शिकायत से जुड़ा था, जिसमें चैनल पर पुलिस अधिकारी से मारपीट की घटना का वीडियो प्रसारित कर उन्हें कथित तौर पर बदनाम करने का आरोप लगाया गया।
जस्टिस रणजीत सिंह भोंसले ने कहा कि शिकायत में दोनों प्रबंध निदेशकों के नाम बाद में जोड़े गए थे, लेकिन नाम जोड़ने के बाद मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता का बयान दोबारा दर्ज या सत्यापित नहीं किया। अदालत ने इसे गंभीर प्रक्रियागत कमी माना।
मामले के अनुसार, 24 अगस्त 2013 को गश्त के दौरान राजेश सावणे ने बस स्टॉप के पास अपने बहनोई को देखा।
अधिकारी के अनुसार पूछताछ करने पर उनके बहनोई नाराज हो गए पहले ऊंची आवाज में बात की और बाद में उनके साथ मारपीट की। इस घटना का वीडियो टीवी9 पर 14 और 15 दिसंबर 2013 को मुंबई खाकीवाला की धुलाई टाइटल से प्रसारित किया गया।
सावणे का आरोप था कि चैनल ने घटना को पक्षपातपूर्ण तरीके से दिखाया और उन्हें बदनाम करने की मंशा से खबर प्रसारित की। उनका कहना था कि चैनल ने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि घटना क्यों हुई और पूरे मामले की वास्तविकता क्या थी।
इसके बाद उन्होंने मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दायर की और उनका बयान सत्यापित किया गया। हालांकि, बाद में उन्होंने शिकायत में संशोधन के लिए आवेदन देकर TV9 के प्रबंध निदेशकों रवि वेलिचेटी और नरसिम्हा मंगिपुडी के नाम भी आरोपी के तौर पर जोड़ने का अनुरोध किया। मजिस्ट्रेट ने 11 अप्रैल 2017 को दोनों के खिलाफ प्रक्रिया जारी करने का आदेश दिया।
इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस भोंसले ने 11 सितंबर के अपने आदेश में कहा कि दोनों निदेशकों के नाम शिकायत में जोड़े जाने के बाद मजिस्ट्रेट अदालत ने शिकायतकर्ता का बयान दोबारा सत्यापित नहीं किया।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयान का सत्यापन केवल औपचारिकता नहीं है। इसका उद्देश्य मामले के वास्तविक और सही तथ्यों का पता लगाना तथा प्रथम दृष्टया स्थिति को स्पष्ट करना है। इसलिए जब संशोधन के जरिए नए आरोपियों के नाम जोड़े गए तो उनके खिलाफ प्रक्रिया जारी करने से पहले शिकायतकर्ता का बयान दोबारा दर्ज करना आवश्यक था।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायत में दोनों याचिकाकर्ताओं को आरोपी संख्या एक और दो के रूप में जोड़ने के अलावा कोई अन्य संशोधन नहीं किया गया। ऐसे में शिकायत में उनके खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप या कथन नहीं होने के बावजूद केवल कंपनी के प्रबंध निदेशक होने के आधार पर उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला कैसे बनता है, यह समझ से परे है।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने दोनों प्रबंध निदेशकों के खिलाफ प्रक्रिया जारी करने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही मजिस्ट्रेट अदालत को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता का बयान दर्ज और सत्यापित करने के चरण से कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही करे।


