दीया मिर्जा के पटाखे वाले वीडियो पर BJP नेताओं की टिप्पणियों से हाईकोर्ट नाराज, BMC को वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश
Amir Ahmad
3 Nov 2026 3:00 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिवाली से पहले सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे न जलाने की अपील करने वाले एक्ट्रेस दीया मिर्जा के वीडियो पर कुछ राजनीतिक नेताओं की टिप्पणियों की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और किसी व्यक्ति को केवल इसलिए किसी त्योहार में हिस्सा लेने से नहीं रोका जा सकता, क्योंकि वह किसी दूसरे धर्म से संबंध रखता है।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने कुछ नेताओं की टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि त्योहार सभी के लिए होते हैं और देश में किसी भी व्यक्ति को किसी त्योहार को मनाने से अलग नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति दूसरे धर्म से है, तो उसके त्योहार में शामिल होने पर आपत्ति कैसे की जा सकती है? क्या भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश नहीं है?
दीया मिर्जा ने यह वीडियो बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुरोध पर बनाया था। इसका उद्देश्य सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे जलाने के खिलाफ अदालत के निर्देशों के बारे में लोगों को जागरूक करना था। हालांकि, BJP नेताओं की आपत्तियों के बाद नगर निगम के सोशल मीडिया अकाउंट से वीडियो हटा दिया गया था। इन नेताओं ने दीया मिर्जा को 'हिंदू विरोधी' करार दिया था।
जस्टिस कुलकर्णी ने कहा कि राजनीतिक नेताओं ने अदालत के पहले के आदेश पर ध्यान दिए बिना टिप्पणियां कीं, जबकि उस आदेश में सभी को जागरूकता अभियान में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि दीया मिर्जा ने अदालत के निर्देशों के अनुरूप वायु प्रदूषण के संबंध में वास्तव में अच्छा संदेश दिया था। इसके बाद उठाई गई आपत्तियां दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि दिवाली जाति या धर्म की परवाह किए बिना सभी लोग मनाते हैं। कोर्ट ने सवाल किया कि दीया मिर्जा की भागीदारी पर धार्मिक आधार पर आपत्ति क्यों जताई गई।
जजों ने कहा कि एक्ट्रेस ने अदालत के निर्देशों के अनुसार काम किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ पार्षदों और राजनीतिक नेताओं का रवैया सही नहीं था और उन्हें इस मुद्दे को कोई दूसरा रंग नहीं देना चाहिए।
जस्टिस गोखले ने कहा कि यह पूरा मामला पर्यावरण से जुड़ा है। उन्होंने टिप्पणी की कि हर व्यक्ति एक ही हवा में सांस लेता है, चाहे वह कोई भी हो। पटाखे जलाने पर रोक लगाने का अर्थ यह नहीं है कि लोगों से त्योहार मनाने का अधिकार छीन लिया जा रहा है।
अंततः हाईकोर्ट ने BMC को दीया मिर्जा का वीडियो दोबारा अपलोड करने और लोगों का भरोसा बहाल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं थी।
खंडपीठ ने कहा कि आपत्तियां कुछ ही लोगों के विचारों को दर्शाती हैं और ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए। जब बात स्वास्थ्य, प्रदूषण और पर्यावरण की हो, तो उसमें गुटबाजी की कोई जगह नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले का अंत सौहार्द और अपनेपन की भावना के साथ होना चाहिए। खासकर मुंबई जैसे शहर में, जो आपसी एकजुटता और अपनेपन की मजबूत भावना के आधार पर कायम है। पीठ ने कहा कि किसी की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी से इस संतुलन को बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

