ED के अटैच फ्लैट के कारण रुका था 44 साल पुरानी इमारत का पुनर्विकास, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोसायटी को NOC देने का दिया आदेश

  • ED के अटैच फ्लैट के कारण रुका था 44 साल पुरानी इमारत का पुनर्विकास, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोसायटी को NOC देने का दिया आदेश

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार, 15 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक हाउसिंग सोसायटी के पक्ष में अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने का निर्देश दिया, ताकि उसकी इमारत का पुनर्विकास शुरू हो सके। 44 साल पुरानी इस इमारत के कुल 10 फ्लैटों में से एक फ्लैट को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत अटैच किए जाने के कारण पुनर्विकास की प्रक्रिया अटकी हुई थी।

    जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस आशीष चव्हाण की खंडपीठ ने यह आदेश सोसायटी की ओर से हलफनामा दाखिल किए जाने के बाद दिया। हलफनामे में सोसायटी ने आश्वासन दिया कि पुनर्विकास पूरा होने पर अटैच फ्लैट के बदले बनने वाला नया फ्लैट ED को सौंप दिया जाएगा और डेवलपर के साथ होने वाले पुनर्विकास समझौते में भी फ्लैट के अटैच होने का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।

    खंडपीठ ने कहा कि ED याचिकाकर्ता सोसायटी के पक्ष में छह सप्ताह के भीतर NOC जारी करे। हालांकि, यह NOC सोसायटी की ओर से हलफनामे में दिए गए आश्वासनों और शर्तों के अनुपालन के अधीन रहेगी।

    मामला मुंबई की अंतराल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी से संबंधित था। हाईकोर्ट ने गौर किया कि सोसायटी की इमारत 44 साल से अधिक पुरानी हो चुकी है और उसमें आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं के साथ लिफ्ट की भी व्यवस्था नहीं है। इमारत की हालत खराब होने के कारण वह रहने के लिहाज से असुरक्षित और अनुपयुक्त हो गई थी। सोसायटी ने यह भी बताया कि उसके कई सदस्य वरिष्ठ नागरिक हैं, जो इमारत की जर्जर स्थिति से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। इसी वजह से सोसायटी ने पूरी इमारत के पुनर्विकास की अनुमति मांगी थी।

    इमारत के फ्लैट नंबर 4 को ED ने अटैच किया हुआ है। सोसायटी ने पुनर्विकास के लिए NOC मांगी थी, क्योंकि इमारत को गिराकर दोबारा बनाने की प्रक्रिया में यह फ्लैट भी शामिल होना था। हालांकि, 2 सितंबर 2025 को ED ने अनुरोध खारिज करते हुए कहा कि फ्लैट अटैच है और झारखंड के रांची स्थित विशेष अदालत की निगरानी में है। इसलिए सोसायटी को उचित मंच से संपर्क करना चाहिए।

    इसके बाद हाईकोर्ट ने सोसायटी से ऐसा हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पुनर्विकास के बाद फ्लैट नंबर 4 के बदले मिलने वाला नया फ्लैट ED को सौंपा जाएगा।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि उस फ्लैट से संबंधित आर्थिक लाभ और अन्य देय राशियों को अलग खाते में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। पुनर्विकास के दौरान निष्पादित होने वाले स्थायी वैकल्पिक आवास समझौते (PAAA) में भी यह स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि मूल फ्लैट ED के अटैचमेंट के अधीन है और नया फ्लैट पुनर्विकास पूरा होने पर ED को सौंपा जाएगा।

    कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में सोसायटी के सचिव ने हलफनामा दाखिल किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि सोसायटी ED की ओर से की गई अस्थायी अटैचमेंट, उसकी पुष्टि या PMLA के तहत लिए गए कब्जे को चुनौती नहीं दे रही है और न ही इन अधिकारों को किसी तरह कमजोर करना चाहती है। सोसायटी का उद्देश्य केवल 44 साल से अधिक पुरानी इमारत के पुनर्विकास की अनुमति हासिल करना है, जबकि फ्लैट नंबर 4 के बदले बनने वाली संपत्ति पर ED के अधिकार सुरक्षित रहें।

    हलफनामे में यह भी कहा गया कि नए फ्लैट की पहचान PAAA में उसके नंबर, मंजिल, विंग और कारपेट एरिया के आधार पर की जाएगी। समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा कि यह फ्लैट ED के अटैचमेंट के अधीन मौजूदा फ्लैट नंबर 4 के बदले आवंटित किया जा रहा है और पुनर्विकास पूरा होने तथा फ्लैट तैयार होने पर इसे ED को सौंप दिया जाएगा। इसके अलावा, फ्लैट नंबर 4 से संबंधित आर्थिक लाभ और अन्य प्राप्तियां डेवलपर या सोसायटी की ओर से ED द्वारा निर्धारित अलग खाते में जमा की जाएंगी। इस खाते में रखी राशि पर ED का विशेष नियंत्रण रहेगा।

    सोसायटी ने यह आश्वासन भी दिया कि नए फ्लैट का कारपेट एरिया मौजूदा फ्लैट नंबर 4 के कारपेट एरिया से कम नहीं होगा। इसमें अतिरिक्त क्षेत्रफल का अधिकार, पार्किंग और अन्य सभी सुविधाएं भी शामिल होंगी, जो पुनर्विकास के तहत दूसरे सदस्यों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

    सोसायटी ने बताया कि अभी तक किसी डेवलपर की नियुक्ति नहीं हुई है। डेवलपर चुने जाने के बाद उसके साथ होने वाले डेवलपमेंट एग्रीमेंट में सभी संबंधित आश्वासनों और शर्तों को शामिल किया जाएगा।

    खंडपीठ ने कहा कि ED ने अपने हलफनामे में जो आशंकाएं जताई थीं, उनमें से अधिकांश का समाधान सोसायटी के हलफनामे से हो गया है। कोर्ट ने कहा कि जिन परिस्थितियों का अभी अनुमान नहीं लगाया जा सकता, उनके लिए सोसायटी या डेवलपर को पहले से बाध्य नहीं किया जा सकता। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया कि अटैच फ्लैट नंबर 4 को भी सोसायटी के अन्य सदस्यों की तरह ही संबंधित लाभ मिलेंगे। डेवलपमेंट एग्रीमेंट और PAAA में इस बात का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए कि फ्लैट ED के अटैचमेंट के अधीन है।

    दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने ED के असिस्टेंट डायरेक्टर की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें पुनर्विकास के लिए मौजूदा फ्लैट गिराए जाने से पहले बैंक गारंटी जमा कराने की शर्त रखी गई। ED चाहता था कि नया फ्लैट सौंपे जाने तक डेवलपर की लागत पर बैंक गारंटी का समय-समय पर नवीनीकरण किया जाए और निर्धारित अंतिम समय सीमा के भीतर नया फ्लैट नहीं सौंपे जाने पर उसे भुनाया जा सके।

    इस मांग को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि सोसायटी के केवल एक फ्लैट पर अटैचमेंट है। ऐसे में पूरी सोसायटी पर वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब डेवलपर का चयन और पुनर्विकास की शर्तें अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई हैं।

    इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया और ED को निर्धारित शर्तों के अधीन छह सप्ताह के भीतर NOC जारी करने का निर्देश दिया।

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