महाराष्ट्र में SIR के दौरान मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाने के खिलाफ याचिका, 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगा हाईकोर्ट
Amir Ahmad
28 Sept 2026 1:27 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की। याचिका में पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित खामियों को दूर करने और पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई।
चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को दो कारोबारियों की ओर से दायर याचिका का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि मामला नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा उठाता है और इस पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है।
वकील ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र की मतदाता सूची से करीब 2 करोड़ 10 लाख नागरिकों के नाम हटाए जाने की आशंका है। दलील सुनने के बाद पीठ ने याचिका पर अगले सोमवार यानी 5 अक्टूबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई।
याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे महाराष्ट्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग यह है कि पुनरीक्षण किस आदेश और दर्ज कारणों के आधार पर कराया जा रहा है। इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही इसकी प्रक्रिया, कानूनी आधार और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
याचिका में कहा गया कि चुनाव आयोग सीमित स्तर पर मतदाता संबंधी जांच कर सकता है, लेकिन वह अंतिम रूप से किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं कर सकता। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह बना रहता है तो मामला नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाना चाहिए और मतदाता सूची से संबंधित निर्णय उसी के आधार पर होना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने से बचाने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करने और पहले हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की भी मांग की।
याचिका में आरोप लगाया गया कि महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए चुनाव आयोग के निर्देशों में गणना के दौरान दस्तावेज जमा कराने का प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद बूथ स्तर के अधिकारी कथित तौर पर गणना प्रपत्र लेते समय नागरिकों से समर्थन दस्तावेज मांग रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी रह सकती है लेकिन इसकी कानूनी वैधता, प्रक्रिया और आधार को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। साथ ही ऐसे उपाय होने चाहिए, जिससे पात्र नागरिकों का नाम केवल किसी संदेह या प्रक्रिया संबंधी कमी के कारण मतदाता सूची से न हटे।
अब हाईकोर्ट 5 अक्टूबर को याचिका पर सुनवाई करेगा।

