अब CBI करेगी दिशा सालियान मौत मामले की जांच, हाईकोर्ट ने कहा- पर्याप्त सबूत के बिना किसी को आरोपी न बनाया जाए
Amir Ahmad
2 Sept 2026 12:31 PM IST

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ा आदेश देते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस रंजितसिंहा भोंसले की खंडपीठ ने दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर सुनवाई करते हुए CBI को मामले की जांच के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया।
हालांकि, हाईकोर्ट ने जांच को लेकर महत्वपूर्ण सावधानी भी बरती। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी को किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मिलने तक उसे आरोपी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत ने CBI के जांच अधिकारी को यह भी निर्देश दिया कि यदि जांच में संज्ञेय अपराध बनता है तो जल्द-से-जल्द आरोपपत्र दाखिल किया जाए। वहीं यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध सामने नहीं आता है तो सक्षम अदालत के समक्ष उचित तरीके से मामला बंद करने की कार्रवाई की जाए।
अदालत ने दिशा के पिता को ऐसी स्थिति में विरोध याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी।
दिशा सालियान की जून 2020 में मुंबई के मालाड इलाके में एक ऊंची इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। उनकी मौत के कारणों को लेकर उस समय से ही सवाल उठते रहे हैं। मुंबई पुलिस का कहना रहा है कि दिशा की मौत इमारत से गिरने के कारण हुई थी।
दिशा के पिता सतीश सालियान ने पिछले वर्ष हाईकोर्ट का रुख करते हुए अपनी बेटी की मौत के मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से संबंधित किसी अपराध को साबित करने वाला पर्याप्त साक्ष्य मिलने से इनकार किया।
बुधवार की सुनवाई में सतीश सालियान की ओर से एडवोकेट निलेश ओझा ने मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने दिशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक उसके पिता के साथ साझा नहीं की और हाईकोर्ट का रुख करने के करीब पांच साल बाद उन्हें यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सतीश सालियान द्वारा शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और कुछ अन्य लोगों के नाम दिए जाने के बावजूद पुलिस ने उनके खिलाफ FIR क्यों दर्ज नहीं की।
महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया। मुख्य सरकारी वकील शिशिर हिराय ने कहा कि जांच के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया, जिसके आधार पर दिशा की मौत के मामले में किसी व्यक्ति के खिलाफ अभियोजन चलाया जा सके। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सामग्री से यह संभावना सामने आती है कि दिशा ने आत्महत्या की हो सकती है या वह दुर्घटनावश इमारत से गिरी हों।
सरकार की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि यदि दिशा के माता-पिता को शुरू से ही किसी व्यक्ति पर संदेह था तो उन्होंने पुलिस के सामने अपने बयानों में यह संदेह क्यों नहीं जताया। हिराय ने कहा कि दिशा के पिता और मां, दोनों ने पुलिस के सामने एक से अधिक बार अपने बयान दर्ज कराए।
सतीश सालियान की ओर से दलील दी गई कि बाद में सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर उन्होंने अपनी बेटी की मौत को लेकर संदेह जताया है। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी फैसले के तहत पुलिस को संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर FIR दर्ज करनी चाहिए थी।
दिशा सालियान की मौत की जांच CBI को सौंपने की मांग का आदित्य ठाकरे की ओर से सीनियर एडवोकेट सुदीप पसबोला ने विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि मौजूदा कार्यवाही राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि पिता की ओर से लगाए गए आरोप सही भी हो सकते हैं और गलत भी, लेकिन पुलिस को FIR दर्ज कर जांच पूरी करनी चाहिए थी ताकि परिवार को उनकी बेटी की मौत के संबंध में अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सके। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि पुलिस करीब पांच से छह वर्षों तक आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट से जुड़ी जांच करती रही।
इस पर शिशिर हिराय ने स्पष्ट किया कि आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट अक्टूबर 2020 में ही बंद कर दी गई। उनके मुताबिक बाद में राज्य में नई सरकार बनने के बाद सोशल मीडिया पर शुरुआती जांच के तरीके को लेकर लगाए जा रहे कई आरोपों का संज्ञान लिया गया और इसके बाद आगे की जांच शुरू की गई।
सरकार ने कहा कि आगे की जांच में भी किसी व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त मजबूत साक्ष्य नहीं मिला।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले की जांच CBI करेगी। हालांकि, अदालत ने साफ कर दिया है कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति को केवल आरोपों या संदेह के आधार पर आरोपी नहीं माना जाएगा। किसी के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मिलने पर ही कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।


