गलत जानकारी देना ही मिथ्या प्रस्तुतीकरण नहीं: 45 साल पुरानी हाउसिंग सोसायटी का पंजीकरण रद्द करने से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार
Amir Ahmad
4 July 2026 3:39 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल गलत या अधूरी जानकारी देना अपने आप में 'मिथ्या प्रस्तुतीकरण' नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी सहकारी समिति का पंजीकरण तभी रद्द किया जा सकता है, जब यह साबित हो कि पंजीकरण जानबूझकर धोखा देकर, तथ्य छिपाकर या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किया गया था। बाद की घटनाओं या पंजीकरण से जुड़े किसी कथित त्रुटिपूर्ण निर्णय के आधार पर पंजीकरण रद्द नहीं किया जा सकता।
जस्टिस संदीप वी. मारणे ने यह फैसला एलीट डायग्नोस्टिक सेंटर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनाया। कंपनी ने सहकारिता मंत्री के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 1981 में पंजीकृत कृष्ण कुंज सहकारी हाउसिंग सोसायटी का पंजीकरण रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता का दावा था कि जिस भूमि पर सोसायटी की इमारत बनी है, उसका स्वामित्व उसके पास है। इसलिए सोसायटी का पंजीकरण मिथ्या प्रस्तुतीकरण के आधार पर हुआ और उसे रद्द किया जाना चाहिए। वहीं, सोसायटी ने अदालत में कहा कि कानून के तहत केवल यह देखा जा सकता है कि पंजीकरण धोखे से हासिल किया गया था या नहीं। याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप इस कसौटी पर खरे नहीं उतरते।
हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 की धारा 21ए के तहत पंजीकरण रद्द करने की शक्ति सीमित परिस्थितियों में ही प्रयोग की जा सकती है। इस प्रावधान का उपयोग पंजीकरण देने वाले अधिकारी के निर्णय की दोबारा समीक्षा करने के लिए नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि भूमि के स्वामित्व को लेकर विवाद कथित अवैध निर्माण से जुड़े मामले या सोसायटी की मानी हुई हस्तांतरण याचिका खारिज होने जैसी घटनाएं पंजीकरण के कई वर्ष बाद की हैं। इसलिए इन्हें पंजीकरण के समय हुए मिथ्या प्रस्तुतीकरण का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण का आवेदन देखने वाला अधिकारी भूमि के स्वामित्व से जुड़े विवादों का फैसला करने के लिए न तो बाध्य है और न ही उसे ऐसा अधिकार प्राप्त है।
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया था कि भवन में केवल छह फ्लैट थे और गैरेज का उपयोग करने वाले लोगों को सदस्य मानकर न्यूनतम 10 सदस्यों की शर्त पूरी नहीं की जा सकती थी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि पंजीकरण आवेदन में छह फ्लैट और चार गैरेज होने की जानकारी पहले से दी गई। केवल गलत या अधूरी जानकारी देने भर से उसे मिथ्या प्रस्तुतीकरण नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा,
"केवल गलत या अधूरी जानकारी देना धारा 21ए के तहत मिथ्या प्रस्तुतीकरण नहीं है। मिथ्या प्रस्तुतीकरण साबित करने के लिए यह दिखाना आवश्यक है कि जानबूझकर धोखा दिया गया, तथ्य छिपाए गए या फर्जी अथवा मनगढ़ंत दस्तावेज पेश किए गए।"
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित हाउसिंग सोसायटी पिछले 45 वर्षों से कार्य कर रही है और उसका पंजीकरण रद्द कराने का प्रयास मुख्य रूप से भूमि के स्वामित्व के दावे को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति के स्वामित्व संबंधी विवादों का समाधान अलग कानूनी कार्यवाही के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि पंजीकरण रद्द कराने की प्रक्रिया का सहारा लेकर।
इन्हीं कारणों से हाईकोर्ट ने सहकारिता मंत्री के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज की।


